मिनीमाता बांगो बांध के विस्थापित मछुआरों की मांग, ठेका व्यवस्था खत्म कर मछली पकड़ने का अधिकार दें

कोरबा।  मिनीमाता बांगो बांध से विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदाय ने अपनी आजीविका के लिए मछली पकड़ने का अधिकार मांगते हुए रायपुर में बड़ा कदम उठाया है। आदिवासी मछुआरा संघ (बांगो जलाशय) और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले समुदाय के प्रतिनिधियों ने मत्स्य महासंघ को ज्ञापन सौंपा और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि चार दशक पहले बांगो बांध के निर्माण से 53 गांव और लाखों हेक्टेयर जंगल व जमीन डूब क्षेत्र में आए, जिससे हजारों परिवार विस्थापित हुए। इनमें से अधिकांश को डूब क्षेत्र के आसपास बसाया गया और शासन ने वादा किया था कि आदिवासी मछुआरा समुदाय जलाशय में मछली पकड़कर अपनी आजीविका चला सकेगा।

छत्तीसगढ़ की मत्स्य नीति में भी विस्थापितों को मछली पालन के लिए प्राथमिकता देने का प्रावधान है, लेकिन इसे केवल 1000 हेक्टेयर तक के जलाशयों तक सीमित कर दिया गया। इससे बड़े जलाशयों में मछुआरों के अधिकार छिन गए और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

इस साल जून में बांगो जलाशय के मछली पकड़ने के ठेके की अवधि खत्म हो रही है। बांध से प्रभावित 19 मछुआरा समितियों ने संयुक्त रूप से ठेका व्यवस्था खत्म कर स्थानीय समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार देने की मांग की है। समुदाय ने ऐलान किया है कि जल्द ही बुका में विशाल सम्मेलन आयोजित कर अपनी मांगों को शासन के सामने रखा जाएगा। प्रतिनिधि मंडल में फिरतु राम बिंझवार, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला सहित अन्य शामिल थे।

यह आंदोलन न केवल विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को उजागर करता है, बल्कि मत्स्य नीति में सुधार और स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर देता है।