एसएलआरएम सेंटर में कचरा से बन रही खाद, प्रभारी सचिव हुए खुश

स्वच्छता कार्यों में लगे वर्ग के प्रयास को सराहा

कोरबा। यथानाम तथागुण की अवधारणा पर कोरबा जिले के दर्रीखार का एसएलआरएम सेंटर यानी मणिकंचन केन्द्र चल रहा है जिसने जिले के प्रभारी सचिव डॉ. रोहित यादव को खुश कर दिया। आसपास से निकलने वाले कचरे का बेहतर उपयोग कर महिलाएं जैविक खाद बना रही है और स्वावलंबी हो रही है। इसके अलावा और भी कई काम यहां पर हो रहे हैं। डॉ. यादव ने इन प्रयासों को सराहनीय बताने के साथ कहा कि इनका विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कोसाबाड़ी जोन कार्यालय में सुशासन तिहार शिविर का जायजा लिया।


जिले के प्रवास पर पहुंचे प्रभारी सचिव डॉ. यादव ने जिले की बैठक से पहले दर्री के मणिकंचन केन्द्र पहुंच कर यहां का निरीक्षण किया। सेंटर में अपशिष्ट प्रबंधन कार्यो एवं वहॉं पर संचालित विभिन्न गतिविधियों व व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

उन्होंने सेंटर का संचालन करने वाली महिला स्वसहायता समूह की सदस्यों व स्वच्छता दीदियों द्वारा किए जा रहे कार्यो की प्रशंसा कर उनका उत्साहवर्धन किया। कर्मियों ने इस दौरान बताया कि यहां और भी कई काम होते हैं। बातचीत का सिलसिला चला तो और जानकारी दी गई।

प्रभारी सचिव को बताया गया कि सूखे व गीले कचरे के पृथकीकरण, अपशिष्ट के रिड्यूज, रियूज व रिसाईकल प्रबंधन करने के साथ गीले कचरे से कम्पोस्ट शेड में खाद तैयार की जाती है। इसके अलावा बेहतर पैकेजिंग के साथ इसकी बिक्री की जाती है जिससे अच्छी कमाई हो रही है।

प्रभारी सचिव ने यहां पर जाना कि महिलाओं के द्वारा मशरूम उत्पादन, गोबर से निर्मित दीयों की पिछले वर्षों में अच्छी मांग रही और इससे आमदनी हुई। स्वावलंबन के विकल्प तलाशने से डॉ. यादव खुश हुए।

इस मौके पर प्रभारी कलेक्टर व निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग, अपर आयुक्त विनय मिश्रा, अधीक्षण अभियंता सुरेश बरूवा, स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.संजय तिवारी, सहायक अभियंता आकाश अग्रवाल, रितेश सिंह, स्वच्छता निरीक्षक शैलेन्द्र नामदेव, पंकज गभेल, धनमोहन कुर्रे आदि उपस्थित थे।

मानदेय समय पर मिल रहा है या नहीं
प्रभारी सचिव डॉ. रोहित यादव ने सेंटर में कार्यरत महिलाओं से मानदेव व समस्याओं पर बातचीत की। उनसे पूछा कि उन्हें सेंटर या सेंटर के बाहर कार्य संपादन के दौरान किसी प्रकार की समस्या तो सामने नहीं आ रही, जिस पर स्वच्छता दीदियों ने उत्साहपूर्वक बताया कि वे वर्ष 2017 से काम कर रही हैं किन्तु आज तक कोई समस्या सामने नहीं आई है, साथ ही समय पर मानदेय भी मिल रहा है एवं सेंटर के माध्यम से पर्याप्त अतिरिक्त आय भी हो रही है।