भारत में सभी जगह माता की पूजा-अर्चना अलग-अलग रूपों में होती है। देश के कई स्थानों पर माता विभिन्न रूपों में विराजित है। वहीं धमतरी जिले में शीतला माता पत्थर के रूप में विराजित हैं। बताया जाता है कि, यह मूर्ति स्वयंभू है। यहां के लोगों का माता पर अटूट विश्वास है। उनका मानना है कि, सच्चे दिल से मांगी गई मन्नत यहां पर पूरी होती है।
सिहावा दर्शन नामक किताब के अनुसार, यह क्षेत्र जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ था। यह स्थान अनेक ऋषि- महात्माओं का तपोस्थल भी है। हर साल चैत्र और क्वांर नवरात्र के अवसर पर यहां मनोकामना ज्योत प्रज्वलित किया जाता है।
विधि-विधान से शीतला माता की पूजा-अर्चना की जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पर दर्शन के लिए आते हैं। इस साल भी यहां पर ज्योति कलश प्रज्वलित किया गया है।
ये है शीतला माता की कहानी
किवंदंति है कि, इन्हीं जंगलों में एक दिन एक लकड़हारा लकड़ी काटने के लिए उसी जंगल में गया था और लकड़ी काटते- काटते उसकी कुल्हाड़ी पत्थर से लग गई। इस वजह से कुल्हाड़ी का धार टूट गया फिर वह आदमी वहीं पर एक टिलानुमा बड़े पत्थर से अपना कुल्हाड़ी को धार करने लगा। धार करते समय उस पत्थर से खून निकलने लगा। लकड़हारा खून देखकर घबरा गया और घर वापस चला गया।
स्वप्न में आईं देवी
रात में शीतला माता लकड़हारे के स्वप्न में प्रकट हुईं और उन्होंने बताया कि, वह साधारण पत्थर नहीं हैं बल्कि साक्षात शीतला देवी हैं। सुबह लकड़हारे ने इसकी जानकारी गांव वालों को दी। इसके बाद लोगों ने उस पाषाण को मां शीतला के रूप में पूजने लगे। धीरे-धीरे यहां पर मंदिर का निर्माण होने लगा। आज यहां पर भव्य मंदिर बना हुआ है। यहां पर लोग बड़ी श्रद्धा से माता शीतला की आराधना करते हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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