वर्षों से लंबित 8 मांगों पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, नकटीखार में चक्काजाम

सड़क, पुलिया, स्कूल भवन और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार की मांग; अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त

नकटीखार। वर्षों से लंबित जनसमस्याओं का निराकरण नहीं होने से नाराज नकटीखार के ग्रामीणों ने आखिरकार सड़क पर उतरकर विरोध जताया। ग्रामीणों ने अपनी 8 प्रमुख मांगों को लेकर चक्काजाम किया, जिससे मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया और यातायात बहाल हो सका।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क, पुलिया और स्कूल भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं के कार्य लंबे समय से अधूरे हैं। वहीं जमीन के नक्शे एवं राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार इन समस्याओं को लेकर कई बार आवेदन और शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने से नाराजगी बढ़ती गई।

ये हैं ग्रामीणों की 8 प्रमुख मांगें
तालाबपारा मार्ग पर पुलिया निर्माण : प्राथमिक शाला नकटीखार से तालाबपारा जाने वाले मार्ग पर तालाब के समीप पुलिया का निर्माण कर सुगम आवागमन की व्यवस्था की जाए।

स्कूल भवन का निर्माण : शासकीय प्राथमिक शाला के लिए स्वीकृत दोनों भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए।

नक्शे की त्रुटि दूर हो : मसनहाती ग्राम के बंदोबस्त के दौरान नक्शे में हुई त्रुटियों के निराकरण के लिए गांव में विशेष राजस्व शिविर लगाया जाए।

जमीन रिकॉर्ड में सुधार : बंदोबस्त के बाद किसानों की जमीन वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज होने की शिकायतों का निराकरण किया जाए।

पुराने राजस्व प्रकरणों का निराकरण : 13-14 वर्षों से लंबित भूमि संबंधी मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए।

भालूसटका-देवरास सड़क : देवरास मोहल्ले तक जाने वाले मार्ग का कांक्रीटीकरण कराया जाए।

अटल चौक-अंधारदहरा सड़क : अटल चौक से अंधारदहरा तक कांक्रीट सड़क का निर्माण कराया जाए।

मुलसीडीह मार्ग और खेल मैदान : ऊपरमुहल्ला होते हुए मुलसीडीह मार्ग का डामरीकरण कराया जाए तथा भालूसटका खेल मैदान को सामुदायिक वनाधिकार के तहत पट्टा प्रदान किया जाए।

जमीन के रिकॉर्ड का कब होगा स्थायी समाधान?
ग्रामीणों की मांगों में जमीन के नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार का मुद्दा सबसे गंभीर है। ग्रामीणों का कहना है कि रिकॉर्ड में वर्षों पुरानी त्रुटियों के कारण किसानों को तहसील और न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समस्या लंबे समय से लंबित है तो इसके स्थायी निराकरण के लिए विशेष राजस्व शिविर आयोजित कर मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए।

लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्काजाम
प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है।

यदि आश्वासन के अनुरूप काम शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आगे क्या कदम उठाएंगे, यह आने वाला समय बताएगा।