कोयला कंपनी में वर्कमैन इंस्पेक्टर की नियुक्ति और वर्कर्स कमेटी समय की मांग

सुरक्षा के अभाव में श्रमिक और अधिकारी एसईसीएल में जान गंवा रहे : डॉ. जायसवाल

कहा-नियोक्ता व दोषी अधिकारियों के विरुद्ध हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे

कोरबा । कोल इंडिया और अनुषंगी कंपनियों में सुरक्षा के अभाव में कोयला उत्पादन करते-करते श्रमिक और अधिकारी जान गंवा रहे हैं। जिस कंपनी में अधिकारी सुरक्षित नहीं, वहां श्रमिकों की दशा सोचनीय है। इसका मुख्य कारण कानून के अनुसार वर्कमैन इंस्पेक्टर की नियुक्ति का न होना एवं आईडी एक्ट, वेतन भुगतान अधिनियम, (माइंस रूल्स) खान अधिनियम का उल्लंघन होना है।

विपरीत परिस्थितियों में कोल इंडिया एवं सहायक कंपनियों में वर्कर्स कमेटी समय की मांग है जिसे लागू कराते हुए कोल इंडिया में कार्यरत 2 लाख 25 हजार कर्मचारियों की जान की सुरक्षा के अभाव में दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही इसे लागू न कराने वाले दोषी अधिकारी तथा विरोध करने वाले तथाकथित श्रम संगठनों के पदाधिकारियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए।


नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (डीएचएन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दीपक जायसवाल ने प्रेस क्लब तिलक भवन में पत्रवार्ता आहूत कर बताया कि इस विषय में व उल्लंघन के संबंध में भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री सुमित डावरा को पत्र प्रेषित किया गया है। डॉ. जायसवाल ने बताया कि पिछले दिनों कुसमुंडा प्रबंधन की लापरवाही तथा खान सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन व मानकों का पालन न करने के कारण सहायक प्रबंधक खनन जितेन्द्र नागरकर की मौत हुई।

घेराव कर लाई जाएगी जन चेतना

डॉ. दीपक जायसवाल ने कहा कि कोरबा, कटघोरा, जांजगीर देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित जिला तथा सबसे अधिक मानव दुर्घटना क्षेत्र हैं। सरकारी कम्पनी के नियोक्ता धड़ल्ले से कानून का लगातार उल्लंघन कर निवासियों के जान का खतरा बना चुके हैं। इस अपराध में प्राइवेट कम्पनी तथा बालको एवं अन्य उद्योग भी आगे हैं, लगातार दुर्घटनायें बढ़ रही है।

बड़े आश्चर्य की बात है कि सरकार किसी भी पार्टी की हो, सरकार एवं सरकारी कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी मौन हैं।

राष्ट्रीय कालरी मजदूर कांग्रेस अब चुप नहीं बैठ सकती इसीलिए जनचेतना के माध्यम से खनन अधिकारी, डी.जी.एम.एस एवं पर्यावरण अधिकारियों का घेराव कर जनचेतना लाएगी। ऐसी कम्पनियों के नियोक्ता तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायलय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।