ओवरबर्डन डंप के करीब पुनर्वास स्थल, सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

जटराज में हुई घटना से नहीं लिया सबक

कोरबा। एसईसीएल की गेवरा परियोजना के विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले विस्थापितों को बसाने के लिए नरईबोध में नए पुनर्वास ग्राम का विकास कराया जा रहा है।

लेकिन पुनर्वास स्थल के ओवरबर्डन (ओबी) डंप के नजदीक होने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि डंप के करीब आबादी बसाने से भविष्य में सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। उनका कहना है कि कुछ महीने पहले जटराज में हुई घटना के बावजूद संबंधित प्रबंधन और प्रशासन ने इन चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है।

एसईसीएल की विभिन्न परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी क्रम में गेवरा क्षेत्र से विस्थापित परिवारों के लिए नरईबोध में पुनर्वास क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, प्रस्तावित पुनर्वास स्थल ओवरबर्डन डंप के ठीक बगल में है।

इस नजदीकी को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई हैं और प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया है।

रोक के बाद फिर शुरू हुआ निर्माण कार्य
शिकायत के मुताबिक, मई-जून में ग्रामीणों की ओर से विभिन्न आपत्तियां उठाई गई थीं। इसके बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जुलाई में पुनर्वास स्थल के विकास कार्य पर रोक लगाई थी। हालांकि, सितंबर में निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पुनर्वास स्थल की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े सवालों का संतोषजनक निराकरण किए बिना काम आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

मिट्टी की ढुलाई और भुगतान पर भी सवाल
शिकायत में निविदा की शर्तों और मिट्टी भराव के काम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अनुसार, पुनर्वास ग्राम के विकास कार्य के लिए जारी निविदा में 1,65,650 घन मीटर मिट्टी एक किलोमीटर की दूरी से और 3,36,600 घन मीटर मिट्टी 10 किलोमीटर की दूरी से लाने का प्रावधान था। इसके लिए 178.69 रुपये प्रति घन मीटर की दर से भुगतान निर्धारित होने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ठेका कंपनी ने संबंधित प्रभारी अभियंता की मिलीभगत से पूरी मिट्टी नजदीक स्थित ओवरबर्डन डंप से ही उपयोग कर ली, जबकि निविदा में लंबी दूरी से मिट्टी लाने का प्रावधान था। इस संबंध में मिट्टी की वास्तविक आपूर्ति, परिवहन दूरी और भुगतान की जांच की मांग की गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

मिट्टी भराव की तकनीक पर भी आपत्ति
एसईसीएल के पुनर्वास ग्राम में सिविल निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही को लेकर सांसद के एसईसीएल प्रतिनिधि शेत मसीह ने प्रशासन से शिकायत की है। शिकायत में मिट्टी के भराव और उसके संघनन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, मिट्टी भराव के दौरान उसे निर्धारित मोटाई की परतों में बिछाकर पानी डालने के बाद रोलर या हैमर से दबाना जरूरी होता है। एक परत का संघनन पूरा होने के बाद ही अगली परत बिछाई जानी चाहिए। आरोप है कि नरईबोध के निर्माण स्थल पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और सीधे छह से सात मीटर ऊंचे मिट्टी के ढेर खड़े कर दिए गए।

शिकायत में आशंका जताई गई है कि यदि मिट्टी का भराव निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, तो भविष्य में बनने वाली सीसी सड़क, नाली, कल्वर्ट और भवनों में दरारें पड़ सकती हैं या निर्माण क्षतिग्रस्त हो सकता है। इस संबंध में तकनीकी जांच कराकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

सुरक्षा और गुणवत्ता की जांच की मांग
नरईबोध पुनर्वास ग्राम में ओवरबर्डन डंप की नजदीकी, मिट्टी की ढुलाई और भराव की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच अब प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की कार्रवाई पर नजर है। प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के साथ पुनर्वास स्थल पर टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।