मानिकपुर माइंस विस्तार की जनसुनवाई 25 को, लंबित मांगों पर ग्रामीणों का धरना जारी

पूर्व मंत्री जयसिंह बोले मांगों का निराकरण पहले हो, प्रभावितों को मझधार में नहीं छोड़ेंगे

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के प्रस्तावित विस्तार से पहले प्रभावित क्षेत्र में लंबित मांगों को लेकर विरोध तेज हो गया है। परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई अब 25 सितंबर को प्रस्तावित है। इससे पहले स्थानीय लोग मानिकपुर परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना की वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता को 5 लाख टन से बढ़ाकर 7 लाख टन किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए एसईसीएल की ओर से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के समक्ष प्रक्रिया शुरू की गई है।

इसी क्रम में पर्यावरणीय जनसुनवाई प्रस्तावित है।

इससे पहले 21 अगस्त को जनसुनवाई निर्धारित की गई थी, लेकिन ट्रेड यूनियनों के विरोध और स्थानीय स्तर पर प्रभावितों की समस्याओं के समाधान की मांग के बाद इसे टाल दिया गया था। स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी लोगों की समस्याओं के समाधान की बात कही थी। अब प्रशासन की ओर से 25 सितंबर को दोबारा जनसुनवाई की तैयारी है।

लंबित मांगों के निराकरण की मांग
जनसुनवाई से पहले प्रभावित क्षेत्र के लोग अपनी पुरानी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि परियोजना विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले लंबित मांगों और प्रभावित परिवारों से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।

इसी बीच पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मानिकपुर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे पूर्व में ग्रामीणों से किए गए वादे पर कायम हैं और उनकी मांगों को मजबूती से उठाते रहेंगे।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने कहा कि परियोजना विस्तार से पहले लोगों की लंबित मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को मझधार में नहीं छोड़ा जाएगा।

अब 25 सितंबर की पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर परियोजना विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है,वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोग अपनी लंबित मांगों के निराकरण पर अड़े हुए हैं।