हरितालिका व्रत के बाद विराजेंगे गणपति, 20 साल बाद बना अद्भुत संयोग

आज चतुर्थी पर घर-घर और पंडालों में होगी विघ्नहर्ता की स्थापना, अनंत चतुर्दशी तक गूंजेगा गणपति उत्सव

कोरबा। गणेशोत्सव को लेकर कोरबा में तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस बार गणेश चतुर्थी पर करीब दो दशक बाद ऐसा संयोग बना है, जब एक ही दिन महिलाएं हरितालिका व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की पूजा करेंगी और इसके कुछ घंटे बाद विघ्नविनाशक भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजित होंगी। रविवार को चतुर्थी के अवसर पर सुबह हरितालिका पूजा के बाद दोपहर से देर रात तक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना का सिलसिला चलेगा। इसके साथ ही शहर और उपनगरीय क्षेत्रों में गणेशोत्सव का उल्लास शुरू हो जाएगा।

कोरबा शहर के अलावा बालकोनगर, दर्री, कुसमुंडा, बांकीमोंगरा, जमनीपाली, दीपका सहित ग्रामीण अंचलों में छोटे-बड़े पंडालों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। कई परिवारों ने घरों में गणपति स्थापना की तैयारी की है।

शनिवार को मूर्तिकारों के कैम्प में भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम चलता रहा। कहीं रंग-रोगन तो कहीं मुकुट, आभूषण और सजावटी हिस्सों को अंतिम रूप दिया गया।

पंचांग के अनुसार उदया तिथि के चलते इस बार सुबह हरितालिका पूजा का मुहूर्त है। हालांकि कुछ स्थानों पर महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम के बाद पूजा करेंगी। वहीं दोपहर से रात तक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना होगी। अनंत चतुर्दशी तक शहर में जगह-जगह धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलेगा। बड़े पंडालों में भीड़ और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने आयोजन समितियों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है।

मिट्टी से सजावट तक बढ़ी लागत
गणेश प्रतिमाओं के निर्माण में इस वर्ष लागत बढ़ी है। स्थानीय मूर्तिकारों के अनुसार मिट्टी, रंग, सजावटी सामग्री और अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने के साथ श्रमिकों की मजदूरी में भी इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर प्रतिमाओं की कीमत पर पड़ा है। छोटी प्रतिमाओं से लेकर बड़े पंडालों के लिए तैयार की गई विशाल प्रतिमाओं तक आकार देने, सुखाने, रंगने और सजाने में कई दिनों की मेहनत लगती है।

ऐसे में इस बार श्रद्धालुओं को पिछले वर्षों की तुलना में प्रतिमाओं के लिए कुछ अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।