उरगा-पत्थलगांव फोरलेन के लिए बढ़ी समयसीमा, मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

जमीन अधिग्रहण में देरी से 7 माह बढ़ा प्रोजेक्ट, 87.34 किमी सड़क पर बन रहे 6 बड़े पुल और 150 पुल-पुलिया

कोरबा। रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के छत्तीसगढ़ हिस्से में चल रहे उरगा-पत्थलगांव फोरलेन सड़क निर्माण की समयसीमा बढ़ा दी गई है। जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण अब इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले निर्माण कार्य अगस्त 2026 तक पूरा होना प्रस्तावित था।

धरमजयगढ़ क्षेत्र में करीब 7 किलोमीटर हिस्से के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने को परियोजना में देरी की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

रायपुर से धनबाद तक प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 627 किलोमीटर है। इसमें छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर और झारखंड में 243 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में परियोजना को अलग-अलग चरणों में विकसित किया जा रहा है।

87.34 किमी लंबी सड़क, लागत करीब 1955 करोड़
उरगा-पत्थलगांव फोरलेन की लंबाई 87.345 किलोमीटर है और परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1955 करोड़ रुपये बताई गई है। कोरबा जिले की सीमा में निर्माण को लेकर बड़ी बाधा नहीं है, जबकि आगे रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण करीब 7 किलोमीटर हिस्से का काम प्रभावित हुआ है।

सड़क बनने के बाद कोरबा से पत्थलगांव की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। वर्तमान में करीब 102 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। नई फोरलेन सड़क से दूरी लगभग 15 किलोमीटर कम होने की बात कही जा रही है।

बिलासपुर-उरगा हिस्से की समयसीमा भी बढ़ी
इकोनॉमिक कॉरिडोर के बिलासपुर-उरगा हिस्से की करीब 70.02 किलोमीटर सड़क का निर्माण भी निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सका है। इसके निर्माण की समयसीमा जून से बढ़ाकर दिसंबर तक की गई है। विभाग का प्रयास है कि बिलासपुर से पत्थलगांव के बीच आवागमन मार्च 2027 तक शुरू किया जा सके।

पत्थलगांव-कुनकुरी फोरलेन की भी तैयारी
उरगा-पत्थलगांव के आगे पत्थलगांव-कुनकुरी 104.25 किलोमीटर सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत करीब 3150 करोड़ रुपये बताई गई है।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण इस हिस्से में भी काम शुरू होने में देरी हुई है। परियोजना पूर्ण होने में लगभग तीन वर्ष लगने का अनुमान है।

इसके बाद कोरबा से झारखंड सीमा तक पहुंचने का सफर करीब ढाई घंटे में पूरा होने की उम्मीद है, जबकि वर्तमान में इस दूरी को तय करने में लगभग छह घंटे लगते हैं।

हाथियों के लिए 11 अंडरपास, वन्यजीवों की सुरक्षा पर जोर
उरगा-पत्थलगांव फोरलेन की खासियत यह भी होगी कि हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में उनके सुरक्षित आवागमन के लिए 11 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। करतला, कुदमुरा और कोरबा रेंज के हाथी प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा स्थान चिन्हित किए गए हैं। सड़क की ऊंचाई बढ़ाने के साथ वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने की व्यवस्था की जा रही है।

6 मेजर ब्रिज और 150 पुल-पुलिया
87 किलोमीटर से अधिक लंबे इस मार्ग पर 6 मेजर ब्रिज, 21 छोटे पुल तथा करीब 150 पुल-पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। गांवों के आसपास लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास भी प्रस्तावित हैं। सड़क तौलीपाली के पास जिल्गा-बरपाली होते हुए धरमजयगढ़ की ओर जाएगी।

सांपों के लिए भी विशेष क्रॉसिंग
परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक और विशेष व्यवस्था की जा रही है। क्षेत्र में पाए जाने वाले सांपों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सड़क के नीचे पाइप के माध्यम से क्रॉसिंग बनाने की योजना है। करीब हर 500 मीटर के अंतराल पर ऐसी व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

सांपों के विश्राम के लिए प्लेटफॉर्म भी तैयार किए जा रहे हैं।

क्षेत्र में पाए जाने वाले किंग कोबरा सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है।

कटघोरा-अंबिकापुर फोरलेन की डीपीआर तैयार हो रही
इसी बीच कटघोरा-अंबिकापुर 138 किलोमीटर मार्ग को भी फोरलेन में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। वर्तमान में यह टू-लेन सड़क है। इसके फोरलेन विस्तार के लिए डीपीआर तैयार करने का काम चल रहा है। दिसंबर तक इसकी मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद जमीन अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

एनएचएआई कोरबा के पीडी अंकित आनंद के अनुसार, इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

धरमजयगढ़ क्षेत्र में समय पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना में देरी हुई है। अब मार्च 2027 तक बिलासपुर से पत्थलगांव के बीच आवागमन शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।