आजादी के 8 दशक बाद भी सरडीह में नहीं पहुंची बिजली, अंधेरे में जिंदगी

पेयजल की समस्या से भी जूझ रहे करीब 25 पहाड़ी कोरवा परिवार

कोरबा। आजादी के करीब आठ दशक बीत जाने के बावजूद कोरबा ब्लॉक के ग्राम पंचायत केराकछार के आश्रित ग्राम सरडीह में रहने वाले करीब 25 पहाड़ी कोरवा परिवार आज भी बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दौर में भी उनके गांव तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाना चिंता का विषय है।

सरडीह में बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रात के समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार मिट्टी तेल भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे चिमनी जलाना मुश्किल हो जाता है। कई परिवार आग जलाकर अथवा पारंपरिक साधनों के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं।

बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
बिजली के अभाव का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे दिन के समय ही पढ़ाई कर पाते हैं। शाम होने के बाद पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। इससे बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

शुद्ध पेयजल के लिए भी परेशानी
ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। बिजली नहीं होने के कारण पानी की उपलब्धता और घरेलू जरूरतों से जुड़े कई काम प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क को छोड़ दें तो विकास की अन्य सुविधाएं अभी भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं पहुंची हैं।

ग्रामीण फूल सिंह राठिया ने बताया कि सरडीह के अलावा बगदरी डांढ़, खुरी भावना, लाल माटी, ढाबा डांढ़ और फुलवारी बस्ती में भी बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है। इन बस्तियों में करीब 5 से 15 तक आदिवासी परिवार निवासरत हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी कोरवा समुदाय के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं के संचालन की बात कही जाती है, लेकिन कई बस्तियों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। उनका कहना है कि राजनीतिक आजादी के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उनका जीवन अब भी कठिनाइयों से घिरा हुआ है।