50 लाख के तालाब जीर्णोद्धार की निविदा पर सवाल, दोबारा टेंडर से नगर पालिका को 20 लाख की क्षति की आशंका

कोरबा/कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक-4 स्थित प्राचीन सरगबंद तालाब के 50.77 लाख रुपये की लागत वाले जीर्णोद्धार कार्य की निविदा प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। आरोप है कि पहली निविदा को निरस्त कर दोबारा टेंडर जारी करने से शासन को करीब 20 लाख रुपये तक की आर्थिक क्षति हो सकती है। पूरे मामले में एक विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, पहली ऑनलाइन निविदा में 15 से अधिक ठेकेदारों ने भाग लिया था। इस दौरान कार्य का टेंडर निर्धारित दर से करीब 25.60 प्रतिशत कम दर पर प्राप्त हुआ था। अंतिम चरण में दो ठेकेदारों द्वारा समान दर प्रस्तुत किए जाने से टाई की स्थिति बनी, जिसके बाद निविदा को निरस्त कर दोबारा आमंत्रित किया गया।

दूसरी निविदा में केवल सात ठेकेदारों ने हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक इनमें से छह ठेकेदारों ने नगर पालिका को आवेदन देकर अपनी निविदा नहीं खोलने का अनुरोध किया है। इसके बाद पूरे टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

आरोप है कि पूरी प्रक्रिया एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रभावित की गई।

बताया जा रहा है कि यदि शेष प्रभावी निविदाकार को कार्य अनुसूचित दर (एसओआर) से लगभग 5 प्रतिशत अधिक दर पर स्वीकृत किया जाता है, तो पहली निविदा की तुलना में शासन को लगभग 20 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ सकता है।

नियमों पर भी उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया में प्राप्त सभी पात्र निविदाओं को नियमानुसार खोला जाना चाहिए। ऐसे में छह निविदाकारों द्वारा निविदा नहीं खोलने का आवेदन और उस पर संभावित कार्रवाई नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। यदि निविदा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कार्यपालन अभियंता ने दिए जांच के संकेत
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि एक ही कार्य के लिए दो बार निविदा जारी की गई है तो यह गंभीर विषय है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की