कोरबा बना मानव-हाथी प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल, तकनीक और जनभागीदारी से घटा संघर्ष

गजसंकेत ऐप, थर्मल ड्रोन, हाथी मित्र दल और डिजिटल मुआवजा व्यवस्था से सुरक्षित हो रहे ग्रामीण, संरक्षण और विकास का संतुलित मॉडल बना जिला

कोरबा।कोरबा जिला मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक नई मिसाल बनकर उभरा है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक योजना, जनभागीदारी और संवेदनशील प्रशासन के समन्वित प्रयासों से जिले में न केवल हाथियों के प्राकृतिक आवास और विचरण मार्गों का संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा, त्वरित राहत और आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन तथा कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत के नेतृत्व में जिला प्रशासन और वन विभाग ने ऐसा समन्वित मॉडल विकसित किया है, जिसकी सराहना अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में भी की जा रही है।

एआई और गजसंकेत ऐप से मजबूत हुई निगरानी
करीब 1.99 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले लेमरू हाथी रिजर्व में एआई आधारित निगरानी, जीआईएस मैपिंग, थर्मल ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, 24×7 हाथी नियंत्रण कक्ष, टोल-फ्री हेल्पलाइन और गजसंकेत मोबाइल ऐप के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

हाथियों की रियल टाइम लोकेशन ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सका है।

सितंबर 2023 से जून 2026 तक गजसंकेत ऐप पर 1,097 हाथी मूवमेंट दर्ज किए गए, जबकि 2.68 लाख से अधिक अलर्ट प्रभावित गांवों तक भेजे गए।

जनहानि और संपत्ति नुकसान में आई कमी
मानव-हाथी संघर्ष के मामलों में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2020-21 में जहां 9 लोगों की जान गई थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 3 रह गई। वहीं वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मानव घायल होने का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इसी तरह वर्ष 2020-21 में 513 मकानों को नुकसान पहुंचा था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 33 रह गई। फसल और संपत्ति नुकसान के मामलों में भी लगातार कमी दर्ज की गई है।

आजीविका और संरक्षण पर समान जोर
वन विभाग हाथी प्रभावित क्षेत्रों में किसान वृक्ष मित्र योजना, लाख उत्पादन, दोना-पत्तल निर्माण, महुआ एवं कोदो प्रसंस्करण, अगरबत्ती निर्माण, सिलाई कार्य तथा इको-टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इससे वन संरक्षण के प्रति स्थानीय लोगों की भागीदारी भी मजबूत हुई है।

डिजिटल होगी मुआवजा प्रक्रिया
प्रशासन अब मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित लोगों को राहत राशि शीघ्र उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन मुआवजा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके माध्यम से आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, प्रकरण की ट्रैकिंग और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी होगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

वहीं डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के जरिए मानव-हाथी संघर्ष को लगातार कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कोरबा का यह मॉडल साबित कर रहा है कि प्रशासनिक दूरदर्शिता, वैज्ञानिक प्रबंधन और जनसहभागिता के समन्वय से मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी जटिल चुनौती का भी प्रभावी समाधान संभव है।