KORBA: पीएम आवास योजना में एक और बड़ा घोटाला! अधूरे मकान को जियो टैग कर निकाली पूरी राशि, मनरेगा भुगतान पर भी सवाल

नोनदरहा गांव का मामला, पोर्टल की तस्वीरों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर; फर्जी जियो टैगिंग और मिलीभगत के आरोप

कोरबा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत नोनदरहा में कथित फर्जी जियो टैगिंग का एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि हितग्राही श्रीमती गुरूवारी बाई राठिया, पति हेतराम राठिया के नाम स्वीकृत आवास का निर्माण अधूरा होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उसे पूर्ण दर्शाकर पूरी राशि जारी कर दी गई। साथ ही मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान भी पूरा कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस आवास के लिए 12 सितंबर 2024 को पहली किश्त 40 हजार रुपये, 9 मई 2025 को दूसरी किश्त 55 हजार रुपये तथा 23 मार्च 2026 को तीसरी किश्त 25 हजार रुपये हितग्राही के खाते में भेजी गई। इसके अलावा मनरेगा मजदूरी का भुगतान भी दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में 24 मार्च 2026 को आवास निर्माण पूर्ण बताया गया है, जबकि स्थानीय स्तर पर आवास अब भी अधूरा होने का दावा किया जा रहा है।

तीन जियो टैग तस्वीरों ने बढ़ाया संदेह

मामले का सबसे अहम पहलू प्रधानमंत्री आवास पोर्टल पर अपलोड की गई जियो टैग तस्वीरें हैं। आरोप है कि तीनों चरणों की तस्वीरों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। पहली तस्वीर में हितग्राही पुराने कच्चे मकान के सामने खड़ी नजर आती हैं। दूसरी तस्वीर में अलग प्रकार का निर्माणाधीन ढांचा दिखाई देता है, जबकि तीसरी तस्वीर में पूरी तरह अलग डिजाइन और अलग भवन नजर आता है। वहीं मौके पर मौजूद वर्तमान स्थिति की तस्वीर में मकान अधूरा दिखाई देने का दावा किया गया है। इससे फर्जी जियो टैगिंग कर किसी अन्य भवन की तस्वीरें अपलोड करने की आशंका जताई जा रही है।
मनरेगा भुगतान पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि आवास निर्माण पूरा हुए बिना ही मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया। मामले में रोजगार सहायक, आवास मित्र, पंचायत सचिव तथा जनपद स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि मिलीभगत से दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर सरकारी राशि का आहरण कराया गया।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
करतला विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जीवाड़े के लगातार मामले सामने आने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं भौतिक जांच, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर, फर्जी तरीके से निकाली गई राशि की वसूली तथा जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।