रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर एसईसीएल मानिकपुर के भू-विस्थापितों का प्रदर्शन, 15 दिन का अल्टीमेटम

महाप्रबंधक को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

कोरबा। एसईसीएल मानिकपुर क्षेत्र के खदान विस्तार से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने सोमवार को रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम भू-विस्थापित समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और हड़ताल शुरू करेंगे।

समिति में मिलाई खुर्द, रापाघर्रा, कुदारीखार, दादर खुर्द सहित करीब 10 प्रभावित गांवों के ग्रामीण शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मानिकपुर खदान विस्तार के दौरान नाला डायवर्सन और अन्य परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ एवं सिंचित भूमि अधिग्रहित कर ली गई।

इसके बाद उनके मकान और खेती योग्य जमीन भी प्रभावित हो गई, लेकिन रोजगार और पुनर्वास के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन छिनने के बाद उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्षों बीत जाने के बावजूद न तो रोजगार मिला और न ही पुनर्वास संबंधी वादे पूरे किए गए।

प्रमुख मांगें
भू-विस्थापित समिति ने ज्ञापन में कई मांगें रखी हैं। इनमें सभी निजी ठेका कंपनियों में प्रभावित गांवों के मूल निवासियों को रोजगार में प्राथमिकता देना, योग्य अभ्यर्थियों के लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण करना तथा ओएसएल जैसी निजी कंपनियों द्वारा कथित रूप से दलाली या पैसों की मांग पर रोक लगाने की मांग शामिल है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कलिंगा कंपनी के समय हुए कथित छलावे की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
समिति ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में भू-विस्थापित समिति के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाएं, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहे। साथ ही छत्तीसगढ़ स्थित एसईसीएल की खदानों में 90 प्रतिशत रोजगार स्थानीय भू-विस्थापितों को आरक्षित किए जाने की मांग भी उठाई गई।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दादर खुर्द के करीब 100 किसानों की जमीन पौधारोपण के बदले रोजगार देने के वादे पर ली गई थी, लेकिन आज तक उन्हें रोजगार नहीं मिला।

समिति ने ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा मुख्य महाप्रबंधक, एसईसीएल कोरबा को भी भेजी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।