देश की एकता और अखंडता के प्रेरणास्रोत थे डॉ. मुखर्जी : संजीव कंसल
कोरबा। कोरबा पूर्व संयंत्र में भारत के प्रखर राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद एवं जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा पौधरोपण कर उनके आदर्शों को स्मरण किया।
कार्यक्रम में मुख्य अभियंता संजीव कंसल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश्वरी रावत एवं एल.एन. सूर्यवंशी ने संयुक्त रूप से डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अभियंता संजीव कंसल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक महान चिंतक, शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।
उन्होंने बताया कि मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे और उस समय वे देश के सबसे कम उम्र के कुलपति थे। उनका व्यक्तित्व और विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि 23 जून 1953 को उनके निधन से देश ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जो भारत को नई दिशा देने की क्षमता रखता था।
यह कार्यक्रम वरिष्ठ कल्याण अधिकारी अजित तिर्की एवं सिविल विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।
समारोह में संयंत्र के बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और सभी ने राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
Editor – Niraj Jaiswal
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