हरदी बाजार-दीपका मार्ग बना हादसों का हॉटस्पॉट, ट्रेलरों की रफ्तार से दहशत में लोग

लगातार सड़क दुर्घटनाओं से बढ़ी चिंता, स्थानीय लोगों ने SECL प्रबंधन और प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

कोरबा। हरदी बाजार-दीपका मुख्य मार्ग पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने क्षेत्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों, विशेषकर ट्रेलर चालकों की लापरवाही के कारण यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। आए दिन हो रही घटनाओं से लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार इस मार्ग पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा एवं दीपका परियोजनाओं से कोयले की ढुलाई के लिए भारी संख्या में ट्रेलरों का संचालन होता है। वाहनों का अत्यधिक दबाव होने के बावजूद सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसके चलते दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

हाल ही में सड़क के डिवाइडर पर मुरुम बिखरा हुआ पाया गया था, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा और दुर्घटना की आशंका बनी रही। इसके अलावा कुछ दिन पूर्व एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने सराई सिंगर निवासी की तीन भैंसों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे पशुओं की मौत हो गई थी।

शनिवार सुबह लगभग 10:30 बजे भी एक और हादसा सामने आया, जब तेज रफ्तार ट्रेलर ने एक कार को टक्कर मार दी। दुर्घटना में कार चालक घायल हो गया, जिसे तत्काल डायल-112 की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई और ट्रेलर चालकों की मनमानी को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेलर चालक परिवहन नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हैं। तेज गति, ओवरलोडिंग और लापरवाह ड्राइविंग के कारण आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। उनका कहना है कि सड़क पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक, स्पीड कंट्रोल व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के प्रभावी उपायों का अभाव है।

क्षेत्रवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन से मांग की है कि कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की नियमित निगरानी की जाए, निर्धारित गति सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हरदी बाजार-दीपका मार्ग पर हादसों का सिलसिला और गंभीर रूप ले सकता है। लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि ठोस और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।