संस्कृत अभ्यास वर्ग में जुटे कई जिलों के शिक्षार्थी, भाषा के वैश्विक महत्व पर हुआ मंथन

कोरबा। संस्कृत भारती के तत्वावधान में सरस्वती विद्यालय, सीतामणी में आयोजित संस्कृत संभाषण प्रबोधन वर्ग में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षार्थी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन एवं अतिथि स्वागत के साथ हुआ।

स्वागत गीत के माध्यम से संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक तिवारी ने अपने उद्बोधन में संवाद, संवेदना और संस्कृत संभाषण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अभ्यास वर्ग केवल भाषा सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी संस्कृत की उपयोगिता स्वीकार की जा रही है तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों ने इसकी संरचित भाषा प्रणाली की सराहना की है।

मुख्य वक्ता एवं संस्कृत महाविद्यालय रायपुर की प्राध्यापिका डॉ. दिव्या देशपाण्डे ने संवादात्मक शैली में संस्कृत की महत्ता और व्यवहारिक जीवन में इसके उपयोग पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन संस्कृत को सभी भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता है। उन्होंने शिक्षा और दैनिक जीवन में संस्कृत के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के विदेश प्रवास और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया।

इस अवसर पर संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ के सर्व वर्गाधिकारी होमेश्वर चंद्राकर, संगठन मंत्री हेमंत साहू, संयोजक मनोज वैष्णव, शिक्षक नरसिंह शास्त्री, आर.सी. साहू, प्राचार्य विद्यानंद पांडेय, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन, उमेंद्र राम, नागेंद्र सिंह एवं संदीप श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।