डीजल महंगा, टोल टैक्स का बोझ भारी, बस संचालकों की बढ़ी मुश्किलें

कोरबा-चांपा मार्ग पर परिवहन व्यवसाय संकट में, यात्रियों पर भी पड़ रहा असर

कोरबा। जिले में बस संचालकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन व्यवसाय की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर कोरबा-चांपा मार्ग पर लगने वाले टोल टैक्स ने बस ऑपरेटरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई बस संचालकों के लिए रोजाना का संचालन खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

कोरबा से चांपा, बिलासपुर, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लिए चलने वाली यात्री बसें हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन हैं। लेकिन लगातार बढ़ते खर्च के कारण अब बस संचालन चुनौती बनता जा रहा है। बस मालिकों का कहना है कि डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि यात्री किराए में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हो पा रही है। इससे आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

बस संचालकों ने बताया कि कई बार डीजल की उपलब्धता प्रभावित होने से बसों का संचालन भी बाधित हो रहा है। समय पर ईंधन नहीं मिलने के कारण बसें रास्ते में खड़ी करनी पड़ती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

कोरबा-चांपा मार्ग पर संचालित टोल प्लाजा भी बस ऑपरेटरों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। संचालकों का कहना है कि प्रतिदिन टोल टैक्स के रूप में बड़ी राशि चुकानी पड़ती है। पहले ही डीजल, वाहन मेंटेनेंस, कर्मचारियों के वेतन और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है, ऊपर से टोल टैक्स ने अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया है।

बस संचालकों ने आशंका जताई है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कई छोटे ऑपरेटरों को बस संचालन बंद करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के यात्रियों पर पड़ेगा, जो आज भी बस सेवा पर सबसे अधिक निर्भर हैं।

यात्रियों ने भी माना कि पिछले कुछ समय से बस संचालन पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। कई बार बसें देर से पहुंच रही हैं और गर्मी के मौसम में रास्ते में रुकने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर मजदूर वर्ग, छात्र और रोजाना यात्रा करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।