जल, जंगल और जमीन के अधिकार पर कांग्रेस का महासम्मेलन, सरकार पर साधा निशाना

बुका में जुटे कांग्रेस के दिग्गज नेता, आदिवासी और मछुआरा समुदाय के अधिकारों की उठी आवाज

कोरबा।जिले के बुका में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकार को लेकर आयोजित महासम्मेलन में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा की बात कही।

महासम्मेलन में पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद ज्योत्सना महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, हरीश परसाई, सूरज महंत सहित कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे। सम्मेलन में मत्स्य नीति 2022 में संशोधन कर ठेका प्रणाली समाप्त करने और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुआरा समितियों को अधिकार देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में पेशा कानून लागू कर ग्रामसभाओं को मजबूत बनाने का प्रयास किया था, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।

सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि आदिवासी और मछुआरा समुदाय की लड़ाई में वे हमेशा साथ खड़ी रहेंगी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार आदिवासियों का है और इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल हसदेव जलाशय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के बड़े जलाशयों से जुड़े लोगों की समस्या बन चुकी है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि वन अधिकार मान्यता कानून आदिवासियों को उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसमें जल संसाधनों का अधिकार भी शामिल है, लेकिन वर्तमान सरकार इसकी अनदेखी कर रही है।

कार्यक्रम संयोजक दीपक मंझवार, फिरतू बिंझवार, ऋषि सहित अन्य वक्ताओं ने भी आदिवासी हितों की रक्षा और विस्थापन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

सम्मेलन में पूर्व मंत्री प्रेमसाय टेकाम, विधायक जनकराम ध्रुव, प्रशांत मिश्रा, राजकिशोर प्रसाद, आदित्य शरण सिंहदेव सहित बड़ी संख्या में आदिवासी और मछुआरा समुदाय के लोग मौजूद रहे।