कोरबा। कोरबा जिले में पूर्व मध्यप्रदेश काल में बने हसदेव पुल (कुदुरमाल) की स्थिति गंभीर हो गई है। पुल पर कई जगह क्रेक आने के कारण लगभग एक वर्ष से आवागमन के लिए इसे बंद कर दिया गया है। सुधार कार्य चल रहा है, लेकिन देरी से समस्या बढ़ती जा रही है।
इसके कारण रोजाना 3 हजार से अधिक भारी वाहनों को 30 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे प्रतिदिन लाखों लीटर ईंधन बर्बाद हो रहा है। जानकारों के अनुसार, इस चक्कर में रोजाना करीब 41 लाख रुपये का ईंधन व्यर्थ जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन बचत की अपील के बावजूद जिले में यह स्थिति बनी हुई है। उरगा से होकर कुदुरमाल-कनकी रूट पर बिलासपुर-रायपुर जाने वाले भारी वाहनों की संख्या बहुत अधिक है। पुल सुधार की लागत भी बढ़कर डेढ़ सौ करोड़ तक पहुंचने की आशंका है, जो अंततः जनता के टैक्स पर ही बोझ बनेगी।
स्थानीय लोगों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने पुल के सुधार कार्य में तेजी लाने और यातायात सुविधा बहाल करने की मांग की है। पुल की मरम्मत में हो रही देरी न केवल ईंधन की बर्बादी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ावा दे रही है।
प्रशासन से अपील की जा रही है कि इस महत्वपूर्ण पुल को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
Editor – Niraj Jaiswal
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