कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान विस्तार परियोजना के तहत ग्राम खोडरी, पाली और जटराज की 400 एकड़ से अधिक जमीन प्रभावित होने जा रही है। प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए चिन्हित बसाहट स्थलों पर सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की तैयारी तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार जटराज के प्रभावित ग्रामीणों को सर्वमंगला मंदिर के आगे नहर मार्ग किनारे बसाने की योजना बनाई गई है। यहां डंपिंग यार्ड की मिट्टी काटकर भूमि समतलीकरण कराया गया है।
हालांकि ग्रामीणों ने संभावित भूस्खलन और सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के दौरान मिट्टी कटाव की समस्या पहले ही सामने आ चुकी है।
इधर ग्राम खोडरी और पाली के प्रभावितों को वैशाली नगर के पास कुसमुंडा फोरलेन किनारे बसाने की तैयारी की जा रही है। यहां सड़क और पानी टंकी का निर्माण कराया जा चुका है तथा अन्य आवश्यक कार्य जारी हैं। मानसून को देखते हुए माना जा रहा है कि विस्थापन की प्रक्रिया बारिश के बाद तेज हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खोडरी क्षेत्र की अधिग्रहित जमीन पर खनन कार्य शुरू होने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। प्रभावित परिवारों ने जल्द समाधान की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना को 75 मिलियन टन वार्षिक कोयला उत्पादन की मंजूरी कोल इंडिया लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से मिल चुकी है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुसमुंडा परियोजना को 39 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।
Editor – Niraj Jaiswal
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