जेठ में खानपान पर रखें खास ध्यान, बैंगन-लाल मिर्च से बचने की सलाह

कोरबा। 2 मई से ज्येष्ठ (जेठ) मास का आरंभ हो गया है,जो 29 जून तक रहेगा। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने मौसम और परिस्थितियों के हिसाब से लोगों को सलाह दी है कि इस अवधि में अधिक पानी का उपयोग करें तथा पाचन तंत्र की अनुकूलता के लिए बैंगन और लाल मिर्च से बचें।

डॉ. शर्मा ने कहा कि ज्येष्ठ मास में दिन बड़े होने के कारण रात्रि भोजन से भी बचना चाहिए। अत्यधिक गरिष्ठ, मसालेदार भोजन और लाल मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए। समय पर भोजन के साथ ही सुपाच्य चीजों का इस्तेमाल करना होगा।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में बेल, संतरा, अनाजों में जौ, ज्वार की खीर, सत्तू, चावल, मक्के की खीर, मोंठ, चना, तुअर, मसूर दाल, नारियल, तुरई, ककड़ी, जिमीकंद, हरा धनिया, करेला, लौकी, सहजन की फली, पुदीना, चौलाई, पालक आदि तथा मसालों में जीरा, धनिया, पुरानी इमली, मीठा नीम, हल्दी, इलायची, पतली दालचीनी, सत्तू एवं रसदार फलों का सेवन बेहतर होगा।

इसके विपरीत बाजरा, गेहूं, उड़द दाल, सब्जियों में बैंगन, मूली, नई इमली, फूल गोभी, पत्ता गोभी, टमाटर, चुकंदर, अदरक, काली मिर्च तथा फलों में पपीता का उपयोग न करने की सलाह दी गई है।