कोरबा। तेज गर्मी हो, या कड़कड़ाती ठंड, चाहे झमाझम बारिश का मौसम। इन सबके बीच लोगों तक खबर पहुंचाने की जिम्मेदारी अखबार वितरकों की है। तमाम तरह की जोखिम के बावजूद सूर्योदय से पहले यह वर्ग कलेक्शन सेंटर में पहुंचता है और अपना काम पूरा करता है। इसी के साथ लोगों को मालूम चलता है कि कुछ घंटे पहले अपने शहर से लेकर देश-दुनिया में क्या-कुछ हुआ।
अखबार वितरकों के संघर्ष को समझना जरूरी
श्रम दिवस पर कई मुद्दों की बात होती है, तब मेहनत-मशक्कत करने वाले अखबार वितरकों की जिंदगी को समझना, उनके संघर्ष को पहचानना और उनके योगदान को सम्मान देना जरूरी हो जाता है।
कोयला वाहनों के बीच जोखिम उठाते वितरक
कोरबा जैसे औद्योगिक शहर में अखबार बांटना केवल एक काम नहीं, बल्कि जोखिम से भरा दायित्व है। सुबह के अंधेरे में जब सड़कें कोयला ढोने वाले भारी वाहनों से भरी रहती हैं, तब ये वितरक बिना किसी सुरक्षा के अपने रास्ते पर निकल पड़ते हैं। उन्हें आसपास की परेशानियां भी नहीं रोक पातीं।
दशकों से जारी है दिनचर्या
वरिष्ठ वितरक बताते हैं कि दशकों से यही दिनचर्या है—सुबह जल्दी उठना, अखबार लेना और तय समय पर हर घर तक पहुंचाना। उनके अनुसार, काम छोटा लग सकता है, लेकिन जिम्मेदारी बड़ी होती है।
नई पीढ़ी भी जुड़ी इस जिम्मेदारी से
दूसरी ओर, नई पीढ़ी के युवा भी इस काम से जुड़े हुए हैं। एक युवा वितरक, जो पढ़ाई के साथ यह काम करता है, बताता है कि यह उसके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का एहसास भी है। सुबह के समय सड़क पर निकलना आसान नहीं होता, लेकिन यह काम हमें अनुशासन और मेहनत का मूल्य सिखाता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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