25 मार्च की डेडलाइन फेल, 7500 क्विंटल धान अब भी उठाव के इंतजार में

12 खरीदी केंद्रों में अटका धान, मार्कफेड और मिलर्स की लापरवाही से समितियां परेशान

कोरबा।जिले में धान उठाव को लेकर किए गए प्रशासनिक दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। 25 मार्च तक शत-प्रतिशत उठाव का दावा किया गया था, लेकिन अप्रैल के पहले पखवाड़े तक भी 12 उपार्जन केंद्रों में करीब 7500 क्विंटल धान उठाव के इंतजार में पड़ा हुआ है।

जानकारी के अनुसार जिले के 65 खरीदी केंद्रों में से 12 केंद्र ऐसे हैं, जहां धान का उठाव अब तक पूरा नहीं हो सका है। अखरापाली में 3840 क्विंटल और कोरबी (पोड़ी उपरोड़ा) में 1440 क्विंटल धान अब भी शेष है। इसके अलावा पसान में 640 क्विंटल, छुरीकला में 280, बेहरचुआं में 210, सिरमिना में 209.2 क्विंटल धान का उठाव लंबित है। वहीं केरवाद्वारी, श्यांग, बोइदा, मोरगा, पोड़ी और नोनबिर्रा केंद्रों में भी सैकड़ों क्विंटल धान पड़ा हुआ है।

समितियों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि उठाव में देरी के कारण अंतिम मिलान और प्रोत्साहन राशि अटकने की स्थिति बन रही है। इससे श्रमिकों के पारिश्रमिक और अन्य खर्चों का भुगतान प्रभावित हो रहा है।

इस पूरे मामले में मार्कफेड और अनुबंधित राइस मिलर्स का लचर रवैया सामने आया है। आरोप है कि मिलर्स प्रशासन और डीएमओ के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमानी कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।

कोरबी समिति प्रबंधक ने उठाया कठोर कदम
उठाव में देरी से परेशान होकर कोरबी समिति के प्रबंधक राजेन्द्र विध्न्यराज ने पांच दिन पहले जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया था। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को समस्या से अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गई। हालांकि समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बच गई।

इस घटनाक्रम ने धान उठाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर किया है।