25 साल बाद भी हालात जस के तस,लोगों ने पूछा क्या यही है अमृतकाल?
कोरबा।कोरबा जिले के सपलवा पंचायत अंतर्गत आश्रित ग्राम छिंदपहरी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां के ग्रामीण पक्की सड़क, शुद्ध पेयजल और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। जिले के गठन के 27 वर्ष और छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के बावजूद गांव में विकास नहीं पहुंच सका है।
पाली विकासखंड के इस गांव के लोगों का कहना है कि आज भी वे उपेक्षा का शिकार हैं। गांव में न तो शासकीय स्कूल है और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है, वहीं ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं, जिससे अक्सर पानी की समस्या बनी रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के दावे यहां तक नहीं पहुंचे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र तो खोला गया है, लेकिन वहां भी नियमित संचालन नहीं हो पाता। कार्यकर्ता कभी-कभार ही आती हैं, जिससे बच्चों और महिलाओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। गांव तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क ही एकमात्र विकल्प है, जो बारिश के दिनों में पूरी तरह बाधित हो जाती है। इससे आवागमन मुश्किल हो जाता है और कई बार गांव का संपर्क भी टूट जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने कई बार आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर है।
नाराज ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि जब देश ‘अमृतकाल’ की बात कर रहा है, तब उन्हें बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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