GST रिकवरी कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में बढ़ा असंतोष, टैक्स जमा होने के बाद भी बैंक खाते अटैच – जांच की मांग तेज

कोरबा। कोरबा जिले में राज्य कर (GST) विभाग की रिकवरी कार्रवाई ने व्यापारियों को परेशान कर दिया है। कई व्यापारियों के बैंक खाते अचानक अटैच हो गए हैं, जबकि उन्होंने मूल कर राशि जमा कर दी है या अपील के लिए आवश्यक 20% प्री-डिपॉजिट कर दिया है। व्यापारिक संगठनों ने राज्य कर कार्यालय सर्किल-02 से जारी बड़ी संख्या में नोटिसों और इन पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

व्यापारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा जारी नोटिसों पर उनके लिखित जवाब और दस्तावेज जमा करने के बावजूद समय पर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा। इससे अचानक बैंक खातों से राशि कटने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसके कारण चेक बाउंस, व्यापारिक भुगतान रुकना और नकदी प्रवाह प्रभावित होना जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। छोटे और मध्यम व्यापारियों पर यह कार्रवाई विशेष रूप से भारी पड़ रही है।

व्यापारियों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
कई मामलों में टैक्स पहले ही जमा होने के बाद भी रिकवरी कार्रवाई।
अपील के लिए 20% प्री-डिपॉजिट जमा करने के बाद भी बैंक अटैचमेंट।
सर्किल-02 से हाल के समय में बड़ी संख्या में नोटिस जारी होना।
समान राशि दिखाकर एक से अधिक नोटिस जारी करने का आरोप, जिससे भ्रम की स्थिति।
अंतिम आदेश (FORM GST DRC-07) और सुनवाई पूरी होने से पहले कठोर रिकवरी।

व्यापारियों ने CBIC Circular No. 224/ 18/ 2024- GST (दिनांक 11 जुलाई 2024) का हवाला दिया है। इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि जब प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का आदेश हो चुका हो और GST अपीलीय अधिकरण (Tribunal) अभी कार्यरत न हो, तो करदाता द्वारा धारा 112 के तहत निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा करने और संबंधित अधिकारी को अंडरटेकिंग देने पर शेष मांग की रिकवरी स्थगित मानी जा सकती है। साथ ही GST कानून की धारा 78 (वसूली की समयसीमा) और धारा 79 (रिकवरी प्रक्रिया) का भी जिक्र किया गया है।


व्यापारिक संगठनों ने शासन, वरिष्ठ अधिकारियों और GST विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी कार्रवाइयां GST कानून, नियमों और जारी सर्कुलरों के अनुरूप ही हों। उन्होंने विभाग और करदाताओं के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता की भी मांग की है, ताकि कर प्रणाली में विश्वास बना रहे और व्यापारिक माहौल सकारात्मक रहे।

यह मुद्दा कोरबा के व्यापार जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। व्यापारी संगठन आगे आंदोलन या प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकालने की तैयारी में हैं।