कोरबा। जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरदी बाजार में पिछले एक महीने से एंटी रैबीज इंजेक्शन (रेबीज रोधी टीका) उपलब्ध नहीं है। गर्मी के मौसम में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में इंजेक्शन न होने से पीड़ित मजबूरन बाजार से 400 रुपये प्रति डोज़ की दर से खरीदकर लगवा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार एक पीड़ित को पूरी श्रृंखला में लगभग 5 इंजेक्शन लगवाने होते हैं, जिससे आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता है।
क्षेत्र में कुत्तों के काटने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पीड़ित स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। सहायक चिकित्सा अधिकारी डॉ. युद्धेश सांडे ने बताया कि हरदी बाजार के अलावा उतरदा और कोरबी स्वास्थ्य केंद्रों में भी एक महीने से एंटी रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक नहीं है। विभाग को इसकी मांग पहले ही भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक आपूर्ति नहीं हुई है।
डॉ. सांडे ने कहा, “हम अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएं। पीड़ितों को निजी स्रोत से खरीदना पड़ रहा है, लेकिन हम विभागीय स्तर पर निरंतर फॉलो-अप कर रहे हैं।”
यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर करती है, जहां रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए तत्काल उपलब्धता बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज का इलाज समय पर न मिलने से खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने विभाग से त्वरित आपूर्ति और स्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
यह घटना छत्तीसगढ़ के कई जिलों में समय-समय पर सामने आने वाली वैक्सीन कमी की समस्या का एक और उदाहरण है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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