राखड़ बांध फिर टूटा: एचटीपीपी से निकली राख ने हसदेव नदी को प्रदूषित किया, ग्रामीणों में आक्रोश, ठेकेदार पर भारी वाहन निकालने के लिए बांध तोड़ने का आरोप

कोरबा। कोरबा के 810 मेगावाट हसदेव थर्मल पावर प्रोजेक्ट (एचटीपीपी) से उत्पन्न फ्लाई ऐश (राख) के निपटान के लिए ग्राम झाबू-लोतलोता के पास निर्मित राखड़ बांध का तटबंध एक बार फिर टूट गया। इससे राख मिश्रित पानी का सैलाब हसदेव नदी में समाहित हो गया, जिससे नदी का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया और सफेद रंग का दिखाई देने लगा। यह घटना लगभग दो महीने पहले हुई इसी तरह की घटना की पुनरावृत्ति है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार, राखड़ बांध काफी पुराना होने के कारण पहले ही भर चुका था। प्रबंधन द्वारा कई बार इसकी ऊंचाई बढ़ाई जा चुकी है। हाल ही में ऊंचाई बढ़ाने का कार्य चल रहा था, तभी एक भारी वाहन अनियंत्रित होकर बांध में गिर गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वाहन को निकालने के लिए ठेकेदार ने नियमों की अनदेखी करते हुए बांध का तटबंध तोड़ दिया। तटबंध टूटते ही राख मिश्रित पानी की तेज धार बाहर निकली, जिससे आसपास के खेतों, जमीन और हसदेव नदी में राख फैल गई। बाद में वाहन को बाहर निकाला गया, लेकिन राख का भारी नुकसान हो चुका था।

घटना के बाद ग्रामीणों के विरोध पर एचटीपीपी अधिकारियों ने राख की सफाई का आश्वासन दिया और आंशिक सफाई भी कराई गई। लेकिन पूरी राख हटाई नहीं जा सकी और अब बांध का तटबंध पुनः टूट गया है। इससे राख मिश्रित पानी हसदेव नदी में बह रहा है और आसपास के क्षेत्र में फैल रहा है।

प्रभावित ग्राम और चिंताएं:

झाबू, नवागांव, पुरैनाखार, धनरास, लोतलोता, चारपारा, मड़वामहुआ, ढांडपारा सहित कई ग्राम प्रभावित

नदी का पानी सफेद और प्रदूषित हो गया

गर्मी शुरू होने के कारण सूखी राख हवा में उड़कर घरों, खेतों और खाने-पीने की चीजों में जा रही है

किसानों को खेतों में राख पहुंचने की आशंका, फसल प्रभावित होने का खतरा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। दो महीने पहले भी राखड़ बांध टूटने से बड़ी मात्रा में राख नदी में गई थी, जो बाद में नहरों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंच गई थी। अब दोबारा यही स्थिति बन रही है।

सिविल विभाग के कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल ने बताया कि राखड़ बांध ओवरफ्लो हो गया था, जिससे कुछ राख बाहर निकली है। सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।

ग्रामीणों ने एचटीपीपी प्रबंधन और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की है कि:
राखड़ बांध का स्थायी समाधान निकाला जाए
राख के सुरक्षित निपटान की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सफाई और मुआवजा दिया जाए
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी की जाए

यह घटना एक बार फिर थर्मल पावर प्लांटों से उत्पन्न राख के निपटान और पर्यावरण संरक्षण की गंभीर चुनौती को उजागर करती है। हसदेव नदी, जो क्षेत्र की जीवनरेखा है, उसके प्रदूषण से हजारों ग्रामीणों और किसानों का जीवन प्रभावित हो रहा है।