कोरबा। शहर में संचालित 6 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की सुविधा जल्द शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल पावर सप्लाई के अभाव में यह योजना अधर में लटकी हुई है।
निगम प्रशासन द्वारा सुनालिया चौक के समीप मल्टीलेवल पार्किंग और स्मृति उद्यान के पास शेड तैयार किया जा चुका है। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से चार्जिंग मशीन भी खरीदी जा चुकी है, परंतु तीन माह बीतने के बाद भी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है।
केंद्र सरकार की नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत शहर में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। कोरबा देश के अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है, ऐसे में ई-व्हीकल को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शहर में ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ी है। तीन वर्ष पूर्व जहां इनकी संख्या लगभग 100 थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1500 हो चुकी है। सामान्यतः एक ई-रिक्शा फुल चार्ज होने पर 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय करता है।
चार्जिंग स्टेशन न होने से चालक लंबी दूरी की सवारी लेने से बच रहे हैं। अधिकतर चालक रात में घर पर चार्जिंग करते हैं, जो पूरे दिन के संचालन के लिए पर्याप्त नहीं होती।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में ज्यादा जरूरत
ई-रिक्शा संचालकों ने रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन स्थानों पर सुविधा उपलब्ध होने से लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
चार्जिंग सुविधा के अभाव में कुछ गैरेज संचालकों द्वारा अनाधिकृत रूप से बिजली “हूकिंग” कर चार्जिंग सेवा देने की भी जानकारी सामने आ रही है। इससे विद्युत विभाग को राजस्व हानि होने के साथ ही बिजली चोरी की आशंका बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में कुल प्रदूषण का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा ऑटो और दोपहिया वाहनों से निकलता है। ऐसे में चार्जिंग प्वाइंट शुरू होने से पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
स्थानीय निकाय के लिए भी यह परियोजना राजस्व और रोजगार सृजन का माध्यम बन सकती है। अब वाहन चालकों और नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चार्जिंग स्टेशन की बिजली आपूर्ति कब तक शुरू होती है।
Editor – Niraj Jaiswal
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