कोरबा। कोरबा के बाल गृह में पली-बढ़ी एक अनाथ युवती बिंदु को अब सात जन्मों का साथ निभाने वाला जीवनसाथी मिल गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी में स्थाई कर्मचारी अनिल ने बिंदु का हाथ थामा और दोनों ने 25 फरवरी को वैदिक रीति-रिवाज से अग्नि के सात फेरे लिए।
यह विवाह बाल गृह परिसर में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और विभिन्न वर्गों के प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लेकर नवदंपति को आशीर्वाद दिया।
बिंदु बाल गृह में रहकर पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद अब एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हैं। अनिल ने स्वयं बिंदु को जीवनसाथी के रूप में चुना और बाल गृह की संचालिका श्रीमती रुक्मणी नायर के मार्गदर्शन में सभी रस्में पूरी की गईं। सगाई और मेहंदी की रस्मों के बाद मुख्य विवाह समारोह में हिंदू विधि-विधान से फेरे लिए गए।
बाल गृह संचालिका श्रीमती रुक्मणी नायर ने बताया कि उनका केंद्र कोरबा, चांपा-जांजगीर और सक्ती जिले की शोषित, प्रताड़ित और असहाय बालिकाओं को आश्रय देता है। यहां 18 वर्ष की उम्र तक उन्हें सुरक्षित रहने, खाने-पीने, शिक्षा और कौशल विकास की सुविधा मिलती है। इसके बाद उन्हें नौकरी, स्वावलंबन या वैधानिक रूप से विवाह/साथ रहने के लिए तैयार किया जाता है।
श्रीमती नायर ने खुशी जताते हुए कहा कि बिंदु इस केंद्र की छठवीं ऐसी बालिका हैं, जिनका विवाह बाल गृह की देखरेख में संपन्न कराया गया है।
यह घटना समाज में सकारात्मक संदेश देने वाली है, जो दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, सहयोग और अच्छे इरादे से हर अनाथ बच्ची को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिल सकता है।
समाज के लोगों ने इस विवाह को एक मिसाल के रूप में देखा और दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Editor – Niraj Jaiswal
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