लिखकर रख लीजिए कोरबा मेडिकल कॉलेज में ठेका पहले से तय!

डाइट्री और सिक्योरिटी सर्विस में चहेते ठेकेदारों को लाभ, प्रबंधन का भ्रष्टाचार उजागर

कोरबा।जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में व्यवस्थाओं और गरीब मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा जा रहा है कि यहां इलाज और सुविधाओं से ज्यादा टेंडर मैनेजमेंट का खेल चल रहा है।

मेडिकल कॉलेज में मरीजों के भोजन (डाइट्री सर्विस) और सुरक्षा व्यवस्था (सिक्योरिटी सर्विस) के लिए हाल ही में निविदाएं आमंत्रित की गई हैं, लेकिन यह प्रक्रिया केवल खानापूर्ति साबित हो रही है। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह से बनाई गई हैं कि केवल चहेते ठेकेदार ही पात्र बन सकें।

डाइट्री सर्विस का ठेका लगभग 2 करोड़ रुपये का है, जिसमें निविदा सुरक्षा राशि मात्र 2 लाख रुपये रखी गई है, जबकि 3 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी सर्विस के लिए 7.5 लाख रुपये की भारी-भरकम सुरक्षा राशि तय की गई है। दोनों टेंडरों में शर्तें इतनी जटिल और चयनित रखी गई हैं कि स्थानीय स्तर पर सिर्फ वही कंपनियां पात्र हो सकें, जिन्हें पहले से फायदा पहुंचाना तय है।

दिलचस्प यह है कि एक ओर टेंडर को ग्लोबल बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ का गुमास्ता, जीएसटी और अन्य स्थानीय शर्तें जोड़कर बाहरी या निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

आरोप है कि डाइट्री सर्विस का ठेका फिलिप्स कंपनी और सिक्योरिटी सर्विस का ठेका कामथेन सिक्योरिटी सर्विस को देने का निर्णय पहले ही ले लिया गया है। यही कारण है कि मरीजों के भोजन में कीड़े निकलने, घटिया खाना परोसे जाने, अस्पताल से बच्चे के गायब होने, डॉक्टरों से मारपीट, यहां तक कि डीन के वाहन जलाए जाने जैसी गंभीर घटनाओं के बावजूद प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ता।

पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास इन शर्तों और निर्णयों को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं है। जानकारों का कहना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित भ्रष्टाचार का उदाहरण है, जहां मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से ज्यादा कमीशन की प्राथमिकता तय की गई है।

अब सवाल यह है कि क्या शासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर आरोपों की जांच कराएगा, या फिर हमेशा की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।