कोरबा।कोरबा एवं कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापित किसानों ने जमीन के एवज में रोजगार की मांग को लेकर मंगलवार से एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनशन शुरू कर दिया है। अनशन पर बैठे भूविस्थापितों का आरोप है कि सरकार और प्रबंधन की प्राथमिकता कोयला उत्पादन तो है, लेकिन जिन किसानों की जमीन पर खनन किया जा रहा है, उन्हें उनका वैधानिक हक देने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
अनशन पर बैठे 17 भूविस्थापितों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से जमीन के बदले रोजगार के लिए एसईसीएल के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल पाया है। भूविस्थापितों ने आरोप लगाया कि प्रशासन जमीन अधिग्रहण के लिए बल प्रयोग करता है, लेकिन अर्जित भूमि के एवज में रोजगार देने के लिए कंपनी प्रबंधन पर कोई दबाव नहीं बनाया जाता।
भूविस्थापितों ने बताया कि एसईसीएल कोरबा क्षेत्र अंतर्गत सरायपाली बुड़बुड़ परियोजना के लिए ग्राम बुड़बुड़-राहाडीह की भूमि वर्ष 2007 में अधिग्रहित की गई थी। उस समय मध्यप्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने की शर्तों पर अवार्ड पारित किया गया था और पात्रता प्रमाण पत्र भी जारी किए गए थे।
जिलाधीश द्वारा आयोजित सामूहिक बैठक के बाद रोजगार नामांकन और सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन बाद में प्रबंधन ने एकतरफा निर्णय लेते हुए रोजगार सत्यापन को निरस्त कर कोल इंडिया पॉलिसी 2012 लागू कर दी, जिससे कई खातेदार रोजगार से वंचित रह गए।
प्रबंधन के इस रवैये से परेशान होकर भूविस्थापितों ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने भूविस्थापितों के पक्ष में 40 दिनों के भीतर रोजगार देने का आदेश पारित किया, जिसे डिवीजन बेंच और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। बावजूद इसके, आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर अब भी रोजगार देने से बच रहा है।
इसी तरह कुसमुंडा क्षेत्र में भी पुराने अर्जन मामलों में “अर्जन के बाद जन्म” का हवाला देकर रोजगार से वंचित किया जा रहा है, जबकि इस संबंध में न तो राज्य सरकार और न ही एसईसीएल द्वारा कोई स्पष्ट नीति जारी की गई है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही ऐसे मामलों में रोजगार देने के आदेश पारित कर चुके हैं।
माटी अधिकार मंच ने भूविस्थापितों की पीड़ा को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रबंधन की तानाशाही के चलते विस्थापितों को अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र रोजगार नहीं दिया गया तो फरवरी माह में कुसमुंडा क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अनशनकारियों में कोरबा क्षेत्र से हेमलाल श्रीवास, संतोष कुमार, रूपचंद जायसवाल, शिवकुमार, रामकुमार, दिलीप कुमार तथा कुसमुंडा क्षेत्र से पवन पटेल, राजेंद्र प्रसाद, देवाशीश श्रीवास, रवि यादव, अजय पटेल, श्यामलाल, मोहन पटेल, मनोज कुमार, सुदामा, उज्जैन, हिमांशु और गोपाल शामिल हैं।
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