कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल से भिलाई खुर्द के 300 भू-विस्थापितों को बड़ी राहत: एसईसीएल ने मकानों के मुआवजे और प्रति परिवार 6.78 लाख की बसाहट राशि पर दी सहमति

कोरबा। लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान! दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर खदान के विस्तार के कारण प्रभावित ग्राम भिलाई खुर्द के लगभग 300 भू-विस्थापित परिवारों को अब उचित मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

कैबिनेट मंत्री एवं कोरबा के नगर विधायक लखन लाल देवांगन की अध्यक्षता में एसईसीएल विश्राम गृह, कोरबा में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में भू-विस्थापितों, जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के बीच लिखित सहमति बनी।

बैठक में मंत्री श्री देवांगन ने सख्ती से कहा कि 50 वर्ष पहले खदान के लिए भूमि अधिग्रहण के समय जमीन का मुआवजा दिया गया था, लेकिन अब बस्ती खाली करवाने के लिए मकानों और परिसंपत्तियों का उचित मुआवजा तथा बसाहट/शिफ्टिंग के लिए पर्याप्त राशि अनिवार्य है।

मंत्री ने भू-विस्थापितों की प्रमुख मांग को मजबूती से उठाया कि मूल खातेदार के बजाय आज प्रत्येक परिवार को अलग-अलग मुआवजा दिया जाए, क्योंकि इतने वर्षों में एक खातेदार के कई परिवार हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा आवश्यकता के लिए कोयला महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास भू-विस्थापितों को साथ लेकर ही संभव है।

बैठक के परिणामस्वरूप एसईसीएल ने तत्काल तीन बड़े निर्णय घोषित किए:

सभी प्रभावित परिवारों के मकानों और परिसंपत्तियों की गणना कर उनका पूरा मुआवजा दिया जाएगा।

विस्थापन/बसाहट के लिए प्रति परिवार 6.78 लाख रुपये की राशि देने पर सहमति।

मानिकपुर खदान से जुड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों में भू-विस्थापितों को रोजगार देने की प्राथमिकता।

8 वर्षों से लंबित था मामला
पिछले 8 वर्षों से एसईसीएल बिना उचित मुआवजे के बस्ती खाली कराने पर अड़ा हुआ था, जिससे भू-विस्थापितों में रोष था। मंत्री श्री देवांगन की सक्रियता और संवेदनशील दृष्टिकोण से यह समस्या सुलझी।

बैठक में मौजूद भू-विस्थापितों ने निर्णय का स्वागत करते हुए मंत्री का हृदय से आभार जताया।

जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी परिवारों की विस्तृत गणना कर जल्द से जल्द मुआवजा वितरण सुनिश्चित किया जाए। यह फैसला न केवल भिलाई खुर्द के निवासियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि भू-विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा का एक सकारात्मक उदाहरण भी है।

लखन लाल देवांगन की यह पहल स्थानीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता और जन-समस्याओं के प्रति समर्पण को दर्शाती है।