कोरबा। आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने माघ मास में ऋतु अनुरूप आहार-विहार अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या का पालन कर हम स्वस्थ रह सकते हैं।
माघ मास शिशिर ऋतु का पहला महीना है, जिसमें पौष की अपेक्षा अधिक ठंड पड़ती है। इस मौसम में हृदय रोग, हृदयाघात, वात रोग जैसे लकवा, जोड़ों में दर्द, कफजन्य रोग, बुखार, सर्दी-खांसी तथा त्वचा रोग जैसे खाज-खुजली की संभावना बढ़ जाती है। माघ में कफ दोष का संचय होता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार इस माह में मधुर, अम्ल और लवण रस युक्त तथा पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। मूली और मिश्री का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसी तरह धनिए का प्रयोग भी विष तुल्य माना गया है, इसलिए इससे परहेज करें।
माघ मास में घी और खिचड़ी का सेवन विशेष रूप से हितकारी है। साथ ही सूखा नारियल और कच्ची हल्दी का उपयोग भी अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगा। डॉ. शर्मा ने लोगों से अपील की कि आयुर्वेदिक ऋतुचर्या का पालन कर ठंड जनित रोगों से बचाव करें।
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