आदिवासी महासम्मेलन: जल-जंगल-जमीन बचाने की हुंकार, सांसद ज्योत्सना महंत ने किया समर्थन

कोरबा। कोरबा जिले के जिलगा-मदनपुर राजाडीह क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला सर्वेक्षण के खिलाफ आदिवासियों का विरोध लगातार जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति और जानकारी के बिना सर्वेक्षण कार्य किए जा रहे हैं, जो पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।

इस मुद्दे पर 15 गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर आदिवासी महासम्मेलन का आयोजन किया और शांतिपूर्ण रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।

सम्मेलन में कोलगा, मदनपुर, पसरखेत, गेराव, चचिया, तौलीपाली, कटकोना, जिल्गा, बरपाली, गिरारी, लबेद, गितकुवारी, फुलसरी, बासीन और सोल्वा ग्राम पंचायतों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि पीढ़ियों से यह जंगल और भूमि उनकी आजीविका का आधार हैं। कोयला परियोजना से विस्थापन, पर्यावरण क्षति और वनाधिकारों का हनन होगा।

ग्रामीणों ने मांग की कि ग्रामसभा की विधिवत सहमति के बिना सर्वेक्षण कार्य तत्काल रोका जाए। साथ ही परियोजना के प्रभावों की पारदर्शी जानकारी दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें अनसुनी हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सम्मेलन में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे और ग्रामीणों के विरोध को पूरा समर्थन दिया।