एसईसीएल के सामने 98 दिनों में 93 एमटी कोयला उत्पादन की बड़ी चुनौती, 212 एमटी लक्ष्य पर तेज हुई रणनीति

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सामने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बचे हुए 98 दिनों में 93 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन करने की बड़ी चुनौती है। नए साल की शुरुआत के साथ ही कंपनी ने 212 एमटी के वार्षिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्पादन रणनीति को और तेज कर दिया है।

31 दिसंबर तक एसईसीएल 118 एमटी कोयला उत्पादन कर चुका है, जो कुल लक्ष्य का 84.71 प्रतिशत है। कोल इंडिया की सबसे अधिक उत्पादन करने वाली कंपनी एमसीएल फिलहाल पहले स्थान पर बनी हुई है, जबकि एसईसीएल दूसरे पायदान पर है। एनसीएल का उत्पादन एसईसीएल से 13 एमटी कम होने के कारण दूसरे स्थान पर बने रहने की स्थिति अभी सुरक्षित मानी जा रही है।

लक्ष्य हासिल करने के लिए एसईसीएल ने दैनिक कोयला उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 6 लाख 12 हजार टन कर दिया है। इसके मुकाबले बुधवार को 5 लाख 19 हजार टन उत्पादन दर्ज किया गया। कुल उत्पादन में गेवरा खदान की सबसे बड़ी भागीदारी रही है, जहां से अब तक 34.53 एमटी कोयला निकाला जा चुका है।

कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए एसईसीएल ने खनन पद्धतियों में बदलाव करते हुए रेवेन्यू शेयरिंग और माइन डेवलपर ऑपरेटर (एमडीओ) मॉडल को अपनाया है। इसके तहत निजी कंपनियों को भूमिगत खदानों में खनन कार्य सौंपा गया है। कंपनी का दावा है कि इन नीतियों से आने वाले समय में उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

खनन के साथ-साथ कोयला डिस्पैच में भी तेजी आई है। एसईसीएल ने एक ही दिन में सर्वाधिक 71 रैक कोयला डिस्पैच कर नया रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि मानसून के दौरान जलभराव और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कुछ खदानें अब भी लक्ष्य से पीछे चल रही हैं।

दिसंबर माह में एसईसीएल ने 18 एमटी से अधिक कोयला उत्पादन किया, जिसमें गेवरा, कुसमुंडा और दीपका मेगा परियोजनाओं की प्रमुख भूमिका रही। बुधवार को गेवरा खदान से 1 लाख 87 हजार टन, कुसमुंडा से 1 लाख 32 हजार टन और दीपका से 44 हजार टन कोयला उत्पादन हुआ। तीनों मेगा परियोजनाओं में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन से अधिक उत्पादन के प्रयास लगातार जारी हैं।

इधर, माइंस विस्तार को लेकर एसईसीएल के सामने कई चुनौतियां भी बनी हुई हैं। खदान प्रभावितों की मांगों को लेकर होने वाले आंदोलनों से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में किसी भी तरह का आंदोलन लक्ष्य प्राप्ति को मुश्किल बना सकता है। इसके बावजूद एसईसीएल ने ठोस माइन प्लान तैयार किया है।

कंपनी के सीएमडी हरीश दुहन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी लगातार खदानों का निरीक्षण कर माइन प्लान की समीक्षा कर रहे हैं।