कोरबा। छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी कोरबा में दशकों से बसी इंदिरा नगर बस्ती पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा करीब 250 घरों पर ‘लाल क्रॉस’ का निशान लगाए जाने के बाद मंगलवार को बस्तीवासियों ने पावर हाउस रोड पर पुराने पवन टॉकीज और उषा कॉम्प्लेक्स के पास चक्काजाम कर दिया। सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे 40-50 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास वैध बिजली कनेक्शन हैं और वे नगर निगम को नियमित टैक्स दे रहे हैं। निगम ने यहां बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराई हैं। उनका सीधा सवाल है – “टैक्स देते हैं, तो बेदखल क्यों? बिना पुनर्वास और मुआवजे के बच्चों सहित कहां जाएंगे?”
आरोप लगाया गया कि रेलवे पक्षपात कर रहा है – रसूखदारों के बड़े मकानों को छोड़कर गरीबों की झोपड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है। सोमवार को पार्षदों के नेतृत्व में रेलवे कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी नहीं मिले, दफ्तर में ताला लगा था।
हैरानी की बात यह है कि रेलवे के पास इस जमीन के उपयोग का कोई स्पष्ट प्लान नहीं है – न कॉलोनी बनेगी, न यार्ड। बिना ठोस प्रोजेक्ट के इतनी बड़ी आबादी को विस्थापित करने की जिद से भारी असंतोष है।
मौके पर कोतवाली पुलिस तैनात है और समझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बस्तीवासी अड़े हैं: “पहले बसाने की व्यवस्था, फिर उजाड़ो।” रात भर बैठकों के बाद आंदोलनकारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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