न्याय किसी वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार : प्रधान जिला न्यायाधीश संतोष शर्मा

कोरबा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन में रविवार, 9 नवंबर को कोरबा में राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस धूमधाम से मनाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश संतोष शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करना तथा निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।

कार्यक्रम में प्रधान जिला न्यायाधीश संतोष शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा, “न्याय किसी वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।” उन्होंने प्राचीन काल से लेकर स्वतंत्र भारत की न्यायिक व्यवस्था के विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मुगल एवं मगध काल में त्वरित निर्णय तो होते थे, पर सुनवाई का अवसर नहीं मिल पाता था, जिससे न्याय की पूर्ति अधर में रह जाती थी। स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों एवं जिला न्यायालयों की स्थापना हुई, किंतु निर्बल एवं गरीब वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच कठिन बनी रही। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत संवैधानिक प्रावधान किए गए, जो पीड़ित पक्ष को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।

विशिष्ट अतिथि ज्योति भूषण प्रताप सिंह लॉ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. किरण चौहान ने विधिक सेवा दिवस की आवश्यकता पर जोर देते हुए राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरणों के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इसे निरंतर कानूनी विकास में सहायक बताया।
कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने किया। उन्होंने कहा कि “समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना ही विधिक सेवा दिवस का असली मकसद है।” निःशुल्क विधिक सहायता, विधिक साक्षरता अभियान एवं अदालतों की सुलभता पर आधारित थीम “कानूनी सहायता सबके लिए, हर समय” के तहत लोगों में कानून के प्रति गहरी रुचि जगाई गई।

कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी.)  जयदीप गर्ग, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गरिमा शर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) डॉ. ममता भेजवानी, न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनी तिवारी, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश सुश्री त्राप्ती राधव, प्रथम अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश सुश्री ग्रेसी सिंह सहित लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता, लॉ कॉलेज के विद्यार्थी, प्राधिकरण के कर्मचारी एवं पैरालीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित रहे।

यह आयोजन न्याय तक समान पहुंच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।