कोरबा। धान खरीदी सत्र 2025-26 की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में सरकार ने उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था का परीक्षण करते हुए कोरबा जिले की 19 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है।
इनमें भैंसमा, कोरवी, बरपाली, सिरमिनी, बरपाली जिल्गा, करतला, तुम्मान,अखरापाली, सोनपुरी, सोहागपुर, कटघोरा, भिलाईबाजार,नोनबिर्स,तिलकेजा, हस्दीबाजार, सुखरीकला, सोनपुरी (दादरखुर्द), मोरगा और सुमेधा शामिल हैं।
हैरानी की बात यह है कि वनभूमि पर पट्टा वितरण और कृषि ऋण सुविधा के कारण इन समितियों में किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले सत्र में भी यही समितियां थीं, लेकिन अब तकनीकी व व्यवहारिक कारणों से पंजीकरण बढ़ने पर इन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।
खरीदी अवधि भर प्रशासनिक अधिकारी व उनके सहयोगी बार-बार निरीक्षण करेंगे ताकि कोई समस्या न रहे।
जानकारों का कहना है कि सरकार की योजना से लघु व सीमांत किसान मुख्यधारा में जुड़े हैं। हजारों हेक्टेयर भूमि का रकबा बढ़ा, धान उत्पादन में वृद्धि हुई और किसानों ने एग्रीटेक पोर्टल पर पंजीकरण कराया। पिछले वर्ष करीब 1.38 लाख किसानों ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जो देश में सबसे ऊंचा है।
समझ से परे अफसरों की हैरानी
अधिकारियों को किसानों की बढ़ती संख्या पर हैरानी हो रही है, जबकि यह सरकार की पट्टा-ऋण नीति का सकारात्मक परिणाम है। विशेषज्ञों का मत है कि इसमें संशय की कोई गुंजाइश नहीं। यही वजह है कि इन समितियों में पंजीकरण बढ़ा और किसान आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुए।
Editor – Niraj Jaiswal
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