कोरबा। जिले के बिसाहू दास महंत शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर ने अपने सीनियर आयुर्वेदिक डॉक्टर पर छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया है।
शनिवार को हुई इस घटना के बाद पीड़िता ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर ए के मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (पूर्व में IPC 354) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी आंतरिक जांच के लिए समिति गठित की है।
घटना का विवरण
पीड़िता, जो आयुष विंग विभाग में पिछले तीन महीनों से ट्रेनिंग ले रही थी, ने बताया कि शनिवार को विभाग में ही सीनियर डॉक्टर एके मिश्रा ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। आरोपी ने पीड़िता से कहा, “तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही है, मैं चेकअप कर देता हूं।” जब पीड़िता ने इनकार किया, तो डॉक्टर ने जबरदस्ती उसके शरीर को छूने की कोशिश की। डर के मारे पीड़िता वहां से भाग निकली और घटना की जानकारी सबसे पहले मेडिकल कॉलेज के डीन को दी। इसके बाद परिजनों को सूचित करने पर वे रविवार सुबह कोरबा पहुंचे और थाने में शिकायत दर्ज कराई।
यह घटना चिकित्सा संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब आरोपी खुद एक सीनियर डॉक्टर हो। पीड़िता ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान आरोपी का व्यवहार पहले से ही संदिग्ध था, लेकिन इस बार यह हद पार हो गई।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
सिविल लाइन थाने में दर्ज शिकायत के आधार पर एएसपी नीतीश ठाकुर ने पुष्टि की कि आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज हो चुका है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और साक्ष्य संग्रह में जुटी हुई है। एएसपी ने कहा, “मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. के.के. सहारे ने बताया कि पीड़िता की लिखित शिकायत मिलते ही आंतरिक निवारण समिति का गठन कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “ट्रेनी डॉक्टर की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। समिति दोनों पक्षों के बयान लेकर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।” कॉलेज प्रशासन ने पीड़िता को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
महिला संगठनों और डॉक्टर्स एसोसिएशन ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है, जबकि सोशल मीडिया पर #MeTooInHealthcare जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल संस्थानों में सख्त सतर्कता समितियां और जेंडर सेंसिटिविटी ट्रेनिंग की जरूरत है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही आरोपी की गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, पीड़िता को काउंसलिंग और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
यह मामला न केवल कोरबा बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सनसनी फैला रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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