निभाई सिंदूर खेला की रस्म: महिलाओं ने एक-दूसरे को लगाया सिंदूर, अखंड सौभाग्य की कामना की

कोरबा। शारदीय नवरात्रि के समापन पर शहर भर में दुर्गा प्रतिमाओं को उत्साहपूर्ण विदाई दी गई। कोरबा में पूर्वी परंपरा के अनुरूप बंगाली और अन्य समुदायों की महिलाओं ने सिंदूर खेला की रस्म को पूरे धूमधाम से निभाया।

इस परंपरा में दुर्गा प्रतिमा को सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के गालों, माथे और मांग में सिंदूर लगाया, साथ ही अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और पति की लंबी उम्र की कामना की।

सिंदूर खेला बंगाली संस्कृति की एक प्राचीन रस्म है, जो लगभग 400-450 वर्ष पुरानी मानी जाती है। यह जमींदारों की दुर्गा पूजा से शुरू हुई और अब पूरे बंगाल व अन्य क्षेत्रों में प्रचलित है।

विवाहित महिलाएं साड़ी-गहनों से सज कर पंडाल पहुंचती हैं, जहां वे मां दुर्गा को पान-पत्तों से स्पर्श कर सिंदूर चढ़ाती हैं। फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाते हुए धुनुची नृत्य भी करती हैं, जो मां को प्रसन्न करने का प्रतीक है।

कोरबा के विभिन्न पंडालों में यह दृश्य देखने लायक रहा। महिलाओं के चेहरों पर लाल सिंदूर की चमक और मुस्कान ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

स्थानीय बंगाली समाज की महिलाओं ने बताया कि यह रस्म उनके लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इससे दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नवरात्रि के इस समापन पर शहरवासियों ने विजयादशमी का पर्व भी हर्षोल्लास से मनाया।