हसदेव तट पर माँ सर्वमंगला के जयकारों के साथ जवारा कलश विसर्जन

कोरबा। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर अश्विन शुक्ल नवमी को कोरबा की पवित्र हसदेव नदी के तट पर भक्ति, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर से शुरू हुई जवारा कलशों की भव्य यात्रा का समापन पारंपरिक विधि-विधान के साथ हसदेव नदी तट पर कलश विसर्जन के साथ हुआ। माँ के जयकारों और आध्यात्मिक उल्लास के बीच नवरात्रि का समापन भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ।

अष्टमी के दिन मंदिर में ज्योति कलश हवन-पूजन के बाद नवमी तिथि पर जवारा कलश विसर्जन का विशेष आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी।

राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महाराज) ने अपनी धर्मपत्नी और माता के साथ नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में कलश धारण कर यात्रा का शुभारंभ किया। कलश धारण करने वाली महिलाओं का पूजन-अर्चन कर उन्हें हसदेव घाट की ओर रवाना किया गया।

परंपरा के अनुसार, पाण्डेय परिवार ने विसर्जन से पहले बैगाओं (कलश वाहकों) को शांत कराया। जवारा कलशों को माँ की चुनरी से सजे द्वारों से होकर हसदेव नदी तक ले जाया गया। हनुमानजी और उनकी वानर सेना के प्रतीकात्मक रक्षक दल ने यात्रा की अगुवाई की, जिससे वातावरण भक्ति और दिव्यता से भर गया।

ढोल-मंजीरे और जसगीतों की गूंज
यात्रा के दौरान ढोल-मंजीरे की थाप और जसगीतों की मधुर धुन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। माँ सर्वमंगला के जयकारों से मंदिर प्रांगण से हसदेव घाट तक का मार्ग गूंज उठा। भजन-कीर्तन मंडलियों के भक्तिमय गीतों ने माहौल को और पावन बना दिया। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भक्ति के रंग में डूबे नजर आए। हसदेव नदी तट पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ जवारा कलशों का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माँ से सुख-समृद्धि, शांति और जगत कल्याण की कामना की।

श्रद्धालुओं का उत्साह
श्रद्धालुओं ने आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह जताया। एक श्रद्धालु महिला ने कहा, “ढोल-नगाड़ों और जसगीतों के बीच यात्रा का माहौल ऐसा था मानो पूरा कोरबा माँ की भक्ति में लीन हो गया।

राजपुरोहित नमन पाण्डेय ने कहा यह परंपरा हमारी आस्था और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे पीढ़ी दर पीढ़ी संजोए रखना हमारा दायित्व है। इस बार भक्तों की भारी भीड़ और उत्साह ने नवरात्रि के समापन को अविस्मरणीय बना दिया।