पॉवर हब कोरबा में बिजली संकट: इनवर्टर बन रहा सहारा, उपभोक्ता परेशान

कोरबा। छत्तीसगढ़ का पॉवर हब कहलाने वाला कोरबा, जहां सीएसईबी, एनटीपीसी, बालको, अडाणी पॉवर और अन्य निजी कंपनियों के संयंत्र मिलकर करीब 8 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं, आज बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार फाल्ट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इस तथाकथित पॉवर सिटी में उपभोक्ता इनवर्टर की बैसाखी पर निर्भर हो गए हैं।

स्थानीय बैटरी दुकानों में इनवर्टर की बिक्री और सर्विसिंग में लगातार इजाफा हो रहा है, जो बिजली आपूर्ति की बदहाल स्थिति को उजागर करता है।

कोरबा में बिजली उत्पादन का इतिहास सन 1957 से शुरू होता है, जब तत्कालीन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू के कार्यकाल में 100 मेगावाट का पहला बिजलीघर स्थापित किया गया था। यह संयंत्र दशकों तक चला और बाद में श्रीराम टेक्सटाइल्स को बेच दिया गया। 1960 के दशक में ढेंगुरनाला के पास 220 मेगावाट की परियोजना शुरू हुई, जो करीब छह दशक तक सेवाएं देने के बाद प्रदूषण की समस्याओं के चलते बंद हो गई। वर्तमान में, दर्री में 1340 मेगावाट की दो परियोजनाएं संचालित हैं, जिनमें से 840 मेगावाट का निर्माण भी मध्यप्रदेश के समय में हुआ था।

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, कोरबा ईस्ट में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम से 500 मेगावाट की परियोजना शुरू हुई। इसके अलावा, एनटीपीसी की 2600 मेगावाट, बालको की 1200 मेगावाट और अडाणी पॉवर की 1200 मेगावाट की परियोजनाएं कोरबा को बिजली उत्पादन का गढ़ बनाती हैं। निजी क्षेत्र की अन्य परियोजनाएं भी इसकी शक्ति बढ़ाती हैं।

इतनी विशाल उत्पादन क्षमता के बावजूद, कोरबा के निवासियों को बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और अचानक फाल्ट की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बाहरी लोगों को लगता है कि कोरबा में बिजली की चमक हमेशा बनी रहती होगी, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।

पॉवर कट और फाल्ट की समस्याएं न केवल व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, बल्कि कॉलोनियों और स्लम क्षेत्रों तक में आम हो गई हैं। इनवर्टर अब लगभग हर घर और दुकान की अनिवार्य जरूरत बन गया है। कोरबा शहर और इसके उपनगरीय क्षेत्रों में इनवर्टर की बिक्री में तेजी के साथ-साथ नई दुकानें भी खुल रही हैं, जो इस पॉवर हब की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाती हैं।

वितरण व्यवस्था में सुधार के प्रयास नाकाम
ऊर्जा विभाग ने कोरबा में बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर करने के लिए वितरण कंपनी में अधिकारियों के तबादले किए, लेकिन इन बदलावों का कोई सकारात्मक असर नहीं हुआ। स्थिति जस की तस बनी हुई है, और 3 लाख से ज्यादा उपभोक्ता इन समस्याओं का खामियाजा भुगत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गहरी खामी है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

त्योहारी सीजन में और बढ़ी मुश्किलें
सीएसईबी का दावा है कि दीपावली जैसे प्रकाश के पर्व के दौरान बिजली आपूर्ति में कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन नवरात्र के साथ शुरू हुए त्योहारी सीजन में बिजली की समस्याएं और गंभीर हो गई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जोन कार्यालयों के नंबर शायद ही कभी कनेक्ट होते हैं, और फाल्ट शिकायत नंबरों पर अक्सर कोई जवाब नहीं मिलता। त्योहारी सीजन में जहां उपभोक्ता और कारोबारी सुचारू बिजली आपूर्ति की उम्मीद करते हैं, वहां मौजूदा व्यवस्था उन्हें निराश कर रही है।

कोरबा का पॉवर हब का दर्जा अब केवल कागजों तक सीमित होता जा रहा है। बिजली उत्पादन की विशाल क्षमता के बावजूद, वितरण व्यवस्था की खामियां और प्रशासनिक उदासीनता ने इस शहर की चमक को फीका कर दिया है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होगा, तब तक इनवर्टर ही उनका एकमात्र सहारा बना रहेगा।