हाथियों का उत्पात: सूरजपुर से आए 12 हाथियों ने तोड़े दो मकान, मानव-वन्य संघर्ष बढ़ा

कोरबा । जिले के बांगो थाना क्षेत्र में मोरगा जंगल में सूरजपुर से आए 12 हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया है। इस झुंड ने संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरबा के दो मकानों को तोड़ दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कटघोरा वन मंडल में पहले से ही 52 हाथी विचरण कर रहे हैं, और अब इस बाहरी झुंड के आगमन से मानव-हाथी संघर्ष और गहरा गया है। ग्रामीणों और किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते वन विभाग ने सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भय और नुकसान

पिछले 15 दिनों से सूरजपुर से आए 12 हाथियों का झुंड मोरगा जंगल में डेरा डाले हुए है। इस दौरान इन हाथियों ने आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश कर संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरबा के दो मकानों को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथी जंगल से निकलकर खेतों और बस्तियों में आ रहे हैं, जिससे फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है। इस वजह से ग्रामीणों में भय और नाराजगी का माहौल है। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

मानव-हाथी संघर्ष के कारण

वन अधिकारियों के अनुसार, जंगल में खाने की कमी और पानी की तलाश के कारण हाथी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। कटघोरा वन मंडल में पहले से मौजूद 52 हाथियों के साथ इस नए झुंड के शामिल होने से स्थिति और जटिल हो गई है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों का सामना करने से बचें और शांत रहें।

वन विभाग की कार्रवाई

हाथियों के उत्पात को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने विशेष उपाय शुरू किए हैं। विभाग ने एक विशेष टीम गठित की है, जो हाथियों को जंगल की ओर वापस लौटाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम कर रही है। इसके अलावा, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगल में जल-स्रोत बनाने और खाद्य उपलब्धता बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया गया है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनकी शिकायत है कि बार-बार होने वाले नुकसान से उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ रहा है। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

कोरबा में बढ़ता मानव-वन्य संघर्ष एक गंभीर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल में प्राकृतिक संसाधनों की कमी और मानव अतिक्रमण इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं। वन विभाग के सामने अब न केवल ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, बल्कि हाथियों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की भी जरूरत है।