बीएमएस ने एसईसीएल दीपका प्रबंधन के खिलाफ उठाई आवाज, 18 सूत्रीय मांगों पर सौंपा ज्ञापन

कोरबा।भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कोरबा के एसईसीएल दीपका प्रबंधन की कथित लापरवाहियों और कामगार विरोधी रवैये के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को बीएमएस पदाधिकारियों ने 18 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

बीएमएस ने मांग की है कि पर्यावरणीय स्वीकृति और सीटीओ के अभाव में बंद पड़ी खदानों को तत्काल शुरू करने के लिए उच्च स्तरीय प्रयास किए जाएं। साथ ही, कर्मचारियों का स्थानांतरण उनकी सहमति के बिना अन्य क्षेत्रों में न किया जाए। संगठन ने आरोप लगाया कि हजारों ठेका मजदूरों को न तो एचपीसी का पूरा भुगतान मिल रहा है, न ही वेतन पर्ची दी जा रही है, और उनकी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम में दर्ज नहीं हो रही है।

ज्ञापन में ठेका मजदूरों और उनके आश्रितों के लिए कंपनी के पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा, खदान दुर्घटनाओं में 11वीं राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन की गाइडलाइन के अनुसार IOD (Injury on Duty) का प्रावधान, और ठेका मजदूरों की पूर्ण जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है।

संगठन ने लंबित ग्रुप ग्रेच्युटी, चाइल्ड पेंशन, वेतन समझौता 11 के एरियर (सेवानिवृत्त कर्मचारियों सहित), 2024-25 का श्रम-शक्ति बजट, और लंबित पदोन्नतियों को तत्काल जारी करने की मांग की। इसके अलावा, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पीएफ, पेंशन, बोनस, और रिवाइज पेंशन की राशि बिना देरी के देने का आग्रह किया गया।

बीएमएस ने कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों में सिविल कार्यों में अनियमितताओं की जांच और SAP-ERP सिस्टम में वेतन संबंधी विसंगतियों को सुधारने की मांग भी उठाई। संगठन ने जनरल असिस्टेंट पद पर कार्यरत कर्मचारियों की शिकायत का जिक्र किया, जो वर्षों से लिपिक का काम कर रहे हैं, लेकिन बार-बार परीक्षा रद्द होने से उनकी पदोन्नति रुकी हुई है। बीएमएस ने मांग की कि या तो परीक्षा आयोजित की जाए या उन्हें नियमित लिपिक पद पर पदस्थ किया जाए।

संगठन ने प्रबंधन को चेतावनी दी कि कर्मचारियों को बिना प्रशिक्षण के मूल पद से अन्यत्र कार्य में लगाने की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीएमएस ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों को अनसुना किया गया तो आंदोलन शुरू होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।