कोरबा। कोयला खदानों में कोल स्टॉक की जांच को अब और अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड बड़ा बदलाव करने जा रही है। आगामी दिनों में कोयले के स्टॉक की जांच थ्रीडी लेजर स्कैनर, न्यूक्लियर डेंसिटोमीटर और वैज्ञानिक फार्मूले के आधार पर की जाएगी।
कोल इंडिया अपनी अनुषंगी कंपनियों की खदानों में पारदर्शिता बढ़ाने और सटीक स्टॉक आकलन के लिए यह नई व्यवस्था लागू कर रही है। कंपनी के बोर्ड ने वर्ष 2011 में पारंपरिक पद्धति पर आधारित न्यू येलो बुक को मंजूरी दी थी। इसके बाद खनन क्षेत्र में आई नई तकनीकों को ध्यान में रखते हुए दिसंबर 2018 में सीएमपीडीआई के निदेशक (तकनीकी) की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी।
समिति की सिफारिशों के आधार पर कोयला मंत्रालय के निर्देश पर नवंबर में दी गई रिपोर्ट के बाद अप्रैल माह से इस नई पद्धति को लागू कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन, थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और एयरबोर्न लेजर स्कैनर से स्टॉक की माप ली जाएगी तथा सॉफ्टवेयर के जरिए सीधे वॉल्यूम की गणना होगी। कन्वर्जन फैक्टर का पुनर्निर्धारण हर तीन वर्ष में किया जाएगा। कोयला ग्रेड बदलने या नया स्टॉक ढेर बनने पर तुरंत गणना की जाएगी। ढीले स्टॉक के लिए टीपरो से वजन-आयतन अनुपात लिया जाएगा।
इस बदलाव से परियोजना क्षेत्र और पिट में कोयला चोरी तथा स्टॉक के गलत आकलन पर पूरी तरह लगाम लगेगी। साथ ही ओवररिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि कोयला कंपनियों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कोल इंडिया भविष्य में और भी तकनीकी बदलाव लागू करने की तैयारी कर रही है।
Editor – Niraj Jaiswal
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