कोरबा गोलीकांड: जांच में तालमेल की कमी, पुलिस और CAF के बीच असहमति

कोरबा। 10 सितंबर 2025 को कोरबा में हुए सनसनीखेज गोलीकांड की जांच को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। इस घटना में 13वीं बटालियन, सेंट्रल आर्म्ड फोर्स (CAF) के कांस्टेबल शेशराम बिंझवार ने अपनी इंसास राइफल से अपने चाचा ससुर और साली पर तीन राउंड फायरिंग की थी, जिसमें दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन जांच की प्रक्रिया में पुलिस और CAF के बीच तालमेल की कमी सामने आ रही है।

जांच की जिम्मेदारी पर असहमति

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतीश ठाकुर ने बताया कि चूंकि गोली चलाने वाला CAF का कांस्टेबल था, इसलिए जांच की जिम्मेदारी 13वीं बटालियन, बागों की टीम को सौंपी गई है। वहीं, 13वीं बटालियन के एसपी पंकज चंद्रा ने स्पष्ट किया कि उन्हें पुलिस विभाग से इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण जांच शुरू नहीं हो सकी है। इस असहमति ने जांच की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।

जांच की गंभीरता पर सवाल

गोलीकांड की जांच को लेकर पुलिस और CAF की गंभीरता पर अब सवाल उठ रहे हैं। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार, पहले स्तर पर पुलिस अधिकारी जांच करते हैं, जिसके बाद CAF की टीम तकनीकी जांच करती है। लेकिन इस मामले में दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। इस घटना में इंसास राइफल के उपयोग और इसके पीछे के कारणों की गहन जांच आवश्यक है, लेकिन प्रक्रिया में देरी से ग्रामीणों और पीड़ित परिवार में आक्रोश बढ़ रहा है।

खबरीलाल की भूमिका भी जांच के दायरे में

घटना के समय शस्त्र विभाग से ड्यूटी पर तैनात खबरीलाल की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है। यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी क्या जिम्मेदारी थी और घटना के दौरान उनकी उपस्थिति का क्या प्रभाव रहा। इस पहलू पर भी जांच की जरूरत है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

इस गोलीकांड में अब सभी की निगाहें पुलिस और CAF की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच की प्रक्रिया कब और कैसे आगे बढ़ेगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। इस मामले में पारदर्शी और त्वरित जांच की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।