दीपका खदान में बाड़बंदी का दिखावा, हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों की जान पर संकट

कोरबा, 11 सितंबर 2025: साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की दीपका मेगा माइंस में प्रबंधन द्वारा भारी भरकम धनराशि खर्च कर खदान क्षेत्र में वारबेट वायर से बाड़बंदी कराई गई है। प्रबंधन का दावा है कि इससे हादसों में कमी आएगी, लेकिन स्थानीय ग्रामीण और जानकार इस कदम को महज कागजी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का प्रयास बता रहे हैं। विशेष रूप से, जिस क्षेत्र में बाड़बंदी की गई है, वह जल्द ही खदान विस्तार के लिए अधिग्रहित होने वाला है, जिससे इस कार्य की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।

बाड़बंदी से नहीं, ब्लास्टिंग से है असली खतरा

कोरबा जिला मुख्यालय के नजदीक हरदीबाजार की आबादी से मात्र 100 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित दीपका खदान में प्रबंधन की लापरवाही बार-बार उजागर हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाड़बंदी से हादसे नहीं रुकेंगे, क्योंकि असली खतरा खदान में हो रही हैवी ब्लास्टिंग से है। रोजाना होने वाले विस्फोटों के कारण घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं, मंदिरों की छतें टूट रही हैं, और लोगों की जान व संपत्ति पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि अगर प्रबंधन को वास्तव में सुरक्षा की चिंता होती, तो सबसे पहले ब्लास्टिंग पर रोक क्यों नहीं लगाई गई?

प्रबंधन की अनदेखी, ग्रामीणों का आक्रोश

लंबे समय से क्षेत्र की जनता और मीडिया की शिकायतों को अनसुना करने के बाद अब प्रबंधन ने बाड़बंदी शुरू की है। लेकिन ग्रामीण इसे अपर्याप्त मानते हैं। उनका कहना है कि बाड़बंदी कोई स्थायी समाधान नहीं है। दीपका खदान के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि प्रबंधन ने न तो समय पर सुरक्षा दीवार बनाई और न ही उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया। अब जब हालात बिगड़ चुके हैं, तब प्रबंधन को सुरक्षा की याद आई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर ब्लास्टिंग पर रोक और ठोस सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और कोयला उत्पादन को बाधित करने के लिए कदम उठाएंगे।

भू-अर्जन और मुआवजे की समस्याएं

कोरबा के औद्योगिक क्षेत्र में भू-अर्जन, मुआवजा, और नौकरी से संबंधित समस्याएं लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो समय पर मुआवजा दिया जा रहा है और न ही नौकरी के मामलों का समाधान हो रहा है। प्रबंधन और प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं। कोयला, बिजली, और अन्य उद्योगों में ऐसी समस्याएं बार-बार टकराव की स्थिति पैदा कर रही हैं।

ग्रामीणों का सवाल: जिम्मेदारी कौन लेगा?

ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर भविष्य में ब्लास्टिंग के कारण कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि एसईसीएल प्रबंधन के पास उनके सवालों का कोई जवाब नहीं है। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर भी है कि प्रबंधन कर्मचारियों और प्रभावितों के कल्याण के लिए दी गई जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

हरदीबाजार के ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर प्रबंधन ने जल्द ही ब्लास्टिंग रोकने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि कोयला उत्पादन के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा भी प्रबंधन की जिम्मेदारी है, जिसे वह नजरअंदाज नहीं कर सकता।