मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में “विकसित छत्तीसगढ़@2047” पर संगोष्ठी का सफल आयोजन

कोरबा। शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, कोरबा में छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव 2025 के अंतर्गत “विकसित छत्तीसगढ़@2047” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर की प्रमुख हस्तियों ने अपने विचार साझा किए।

हिंदी विभागाध्यक्ष श्रीमती संध्या पांडेय के संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी में जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष वर्षा दिनेश वैष्णव मुख्य अतिथि थीं, जबकि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने अध्यक्षता की।

मुख्य वक्ताओं में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अंजना सिंह, प्रख्यात कवि हीरामणी वैष्णव, शासकीय ई.वी.पी.जी. महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. दिनेश श्रीवास, भूतपूर्व छात्राएँ गायत्री कुर्रे और रेणुका चंद्रा शामिल रहीं।

श्रीमती संध्या पांडेय ने स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय के विकास को विकसित छत्तीसगढ़ का प्रतीक बताते हुए इसके एक कमरे और 13 छात्राओं से शुरू होकर आज विशाल भवन और हजारों छात्राओं तक के सफर को रेखांकित किया।

मुख्य अतिथि वर्षा दिनेश वैष्णव ने केंद्र और राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों की सराहना की। प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने कोरबा के अतीत, वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

डॉ. अंजना सिंह ने कविता के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को उजागर किया, जबकि हीरामणी वैष्णव ने खनिज संसाधनों और विद्युत उत्पादन के जरिए छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान पर जोर दिया। डॉ. दिनेश श्रीवास ने अविभाजित मध्य प्रदेश से लेकर वर्तमान छत्तीसगढ़ के विकास की यात्रा को रेखांकित किया।

जनभागीदारी सदस्य डॉ. दिनेश वैष्णव ने उद्योग, कृषि, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का संचालन क्रीड़ा विभाग की प्राध्यापक श्रीमती अनिमा तिर्की ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. पापीया चतुर्वेदी, डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. पी.के. सिन्हा, डॉ. विनोद कुमार साहू, डॉ. श्रेणी दिवाकर, श्रीमती वर्षा सिंह तंवर, श्रीमती मोनिका मिंज, श्रीमती अमिता सक्सेना, सुश्री मीनाक्षी शांडिल्य, डॉ. श्वेता पाठक, डॉ. उषा लहरे, डॉ. मंदाकिनी चन्द्रा, मुकेश श्रीवास, डिंपल ठाकुर, मालती साहू सहित अन्य प्राध्यापकों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह संगोष्ठी छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य और विकास के प्रति सामूहिक दृष्टिकोण को रेखांकित करने में सफल रही।