कोरबा।कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत चैतमा वन परिक्षेत्र में तालाब निर्माण, डैम, सड़क और जीर्णोद्धार कार्यों में शासकीय नियमों, तकनीकी मापदंडों और गुणवत्ता की अनदेखी के साथ-साथ शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। इन अनियमितताओं का खुलासा करने के लिए RTI कार्यकर्ता बादल दुबे द्वारा मांगी गई जानकारी को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार दबाने और गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सूचना आयोग, छत्तीसगढ़ के स्पष्ट आदेश के बावजूद जानकारी प्रदान नहीं की गई, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बादल दुबे ने 4 सितंबर 2023 को RTI अधिनियम के तहत वन परिक्षेत्र चैतमा के वित्तीय वर्ष 2022-23 की पै-कैश बुक और संबंधित भुगतान दस्तावेजों की सत्यापित छायाप्रति मांगी थी। लेकिन वन परिक्षेत्र अधिकारी (चैतमा) डी.के. कुर्रे ने जानकारी देने के बजाय आवेदक को गुमराह किया और उच्च अधिकारियों से अपनी नजदीकी का हवाला देकर दबाव बनाया। इसके अलावा, वन मंडल अधिकारी (कटघोरा) कुमार निशांत ने अपील प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया, जिससे जानकारी का खुलासा रोका गया।
इसके खिलाफ बादल दुबे ने 13 दिसंबर 2023 को राज्य सूचना आयोग, छत्तीसगढ़ में दूसरी अपील दायर की। आयोग ने 3 मार्च 2025 को सुनवाई निर्धारित की, जिसमें डी.के. कुर्रे और कुमार निशांत अनुपस्थित रहे। सुनवाई के बाद, मुख्य सूचना आयुक्त ने 21 मार्च 2025 को आदेश जारी कर वन परिक्षेत्र अधिकारी को 30 दिनों के भीतर निःशुल्क जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया। साथ ही, अधिकारियों को RTI अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने की चेतावनी दी गई, अन्यथा धारा 20(1) और 20(2) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, चैतमा वन परिक्षेत्र अधिकारी डी.के. कुर्रे ने उच्च अधिकारियों और कथित राजनीतिक संरक्षण के बल पर सूचना आयोग के आदेशों की अवहेलना की है। यह स्थिति मुख्य वन संरक्षक (बिलासपुर) और वन मंडल अधिकारी (कटघोरा) के लिए चुनौती बन गई है, क्योंकि वे इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ दिख रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि कटघोरा वन मंडल और चैतमा वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का बोलबाला है, और RTI के तहत मांगी गई जानकारी को दबाने के लिए उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
भ्रष्टाचार के आरोप और शासकीय राशि का दुरुपयोग
सूत्रों का कहना है कि चैतमा वन परिक्षेत्र में तालाब, डैम, सड़क और जीर्णोद्धार कार्यों में शासकीय गाइडलाइंस और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी कर फर्जी संरचनाएं तैयार की गई हैं। इन कार्यों में शासकीय राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। RTI के माध्यम से इन अनियमितताओं का खुलासा करने की कोशिश को बार-बार रोका जा रहा है, जो विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
RTI कार्यकर्ता बादल दुबे ने हार नहीं मानी है और इस मामले को और ऊपर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। वे जल्द ही इस प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राज्य सूचना आयोग, मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, वन मंत्रालय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF), और केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त (भारत सरकार) को लिखित शिकायत दर्ज करने की योजना बना रहे हैं।
कटघोरा वन मंडल और चैतमा वन परिक्षेत्र में RTI अधिनियम की अवहेलना और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। राज्य सूचना आयोग के आदेशों की अवहेलना और उच्च अधिकारियों का कथित संरक्षण इस मामले को और गंभीर बनाता है। यदि इस मामले में जल्द ही पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न केवल वन विभाग की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा, बल्कि RTI अधिनियम की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाएगा। बादल दुबे जैसे कार्यकर्ताओं की यह लड़ाई पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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